
लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसान कर्जमाफी के एलान के बाद किसानों के चेहरे पर आई खुशी प्रमाण पत्र मिलने के बाद काफूर होती दिख रही है। लोन माफी का सर्टिफिकेट मिलने के बाद सूबे के तमाम किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ऋणमाफी के नाम पर किसी का 10 रुपए कर्ज माफ हुआ तो किसी का 20, 30, 50, 100 या 200 रुपए। कड़ी धूप में घंटों इंतजार के बाद जब किसानों को ऋणमाफी प्रमाणपत्र मिले तो उनके चेहरे पर हताशा और सरकार के खिलाफ गुस्से के भाव साफ दिखे। मामले पर आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। प्रभारी मंत्री भी अन्नदाताओं के साथ हुए इस मजाक का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार सिर्फ किसानों का नंबर बढ़ाने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसा कर रही है।
पहले चरण में उत्तर प्रदेश के कुल 86 लाख किसानों का ऋणमाफ हुआ है, जिनमें अकेले बिजनौर के किसानों पर 146 करोड़ रुपए खर्च हुआ है। कई किसान ऐसे भी हैं, जिन्हें कर्जमाफी के नाम पर सिर्फ 9 पैसे, 84 पैसे और 2 रुपए ही मिले हैं। बिजनौर जिले में 22 हजार किसानों को ऋणमाफी प्रमाण पत्र बांटे गए, जिनमें से 880 यानी करीब 4 फीसदी से अधिक ऐसे किसान हैं, जिन्हें 500 रुपए से कम का ऋणमाफी प्रमाण पत्र मिला है। इनमें से कई किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले की कर्ज अदा कर दिया था। बिजनौर की एक महिला किसान ने बताया कि उसने डेढ़ लाख का संपूर्ण लोन अदा कर दिया था, फिर भी उसे 9 पैसे का कर्जमाफी प्रमाण पत्र मिला है।
खुद को ठगा महसूस कर रहे अन्नदाता
भव्य आयोजन के बीच 8 सितंबर को बाराबंकी में 5 हजार किसानों को कर्जमाफी प्रमाणपत्र मिला तो उनके आंखों में आसू छलक आए। सैकड़ों रुपया और 5-6 घंटे का समय लगाकर पहुंचे किसानों ने जब प्रमाण पत्र देखा तो खुद को ठगा महसूस कर रहे थे। दर्जनों किसान ऐसे थे, जिन्हें 100 रुपए से कम कर्जमाफ हुआ था, जबकि उन पर हजारों रुपए का बैंक कर्ज था। कई अन्नदाता ऐसे भी थे जिन्हें 2 या 4 रुपये का कर्जमाफी प्रमाण पत्र मिला। सेमरी गांव के निवासी शौकत को जब कर्जमाफी का प्रमाणपत्र मिला तो उन्हें सिर्फ 23 रुपये कर्जमाफी की सौगात मिली। सिपहिया के रमापति को 44 रुपये, अमदहा निवासी सरयू को 89 रुपये, जाटा निवासी शम्भू को 12 रुपये, सेमरी के रमेश द्विवेदी को 17 रुपये, गोठिया के रामदीन को 24 रुपये, मचौची के श्याम बिहारी को 26 रुपये, सोहिल की सीमदेवी को 26 रुपये, हरख के रामकरण को 59 रुपये, चंदौली के बासुदेव को 66 रुपये, सलारपुर के राम कैलाश को 70 रुपये, इचौली के शमीउल्ला को 76 रुपये और रायपुर के कल्लू को 92 रुपये का कर्जमाफी का प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है।
कर्ज 1.5 लाख का, माफ हुए सिर्फ 10 रुपए
हमीरपुर जिले में कहने के लिए तो पांच हजार से अधिक किसानों का कर्जमाफ हुआ है, लेकिन उनमें ऐसे तमाम किसान भी हैं, कर्जमाफी के नाम परजिनके 10-20 रुपए ही माफ हुए हैं। मौदहा तहसील के एक किसान का कर्जमाफी के नाम पर मात्र 10 रुपए 37 पैसे ही माफ हुआ है, जबकि उनके नाम पर 1 लाख 55 हजार का फसली ऋण है। ऐसे कई किसान हैं, जिनका 100 रुपए से कम कर्ज माफ हुआ है, जबकि वह 150 रुपए किराया लेकर कर्जमाफी का ऋण लेने पहुंचे थे। जिले के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल पंत उर्फ मन्नू कोरी ने कहा कि ये मिस्टेक है और मिस्टेक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हमीरपुर के प्रभारी डीएम कुंज बिहारी अग्रवाल पत्रकारों के बार-बार पूछने पर भी चुप्पी साधे रखी।
सरकार कहती कुछ, करती कुछ और है : किसान
महोबा जिले के कबरई निवासी किसान कमलेश पर बैंक का 39 हजार पांच सौ रुपया कर्ज था। लेकिन उनके सिर्फ 238 रुपए ही माफ हुए। कमलेश ने कहा कि एक लाख कर्जमाफी का वादा करने वाली सरकार ने उनके साथ धोखा किया है। सरकार कहती कुछ, करती कुछ और है।
बैंक अधिकारी ने बताया नॉर्मल प्रोसीजर
एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बैंक अधिकारी अजय कुमार ने इसे नॉर्मल प्रोसीजर बताया। उन्होंने कहा कि कई किसान 'किसान क्रेडिट कार्ड' से लोन लेते रहते हैं और उसे अदा करते रहते हैं। ऐसे में लोन अदा करने और नया लोन लेने के बीच उन पर कुछ पैसों का कर्ज रह जाता है।
कर्जमाफी किसानों संग धोखा : सपा प्रवक्ता
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता व उत्त प्रदेश के पूर्व खेलमंत्री अनुराग भदौरिया ने कहा कि कर्जमाफी के नाम पर सरकार किसानों का मजाक उड़ा रही है। जबकि सरकार को किसानों की संवेदना समझना चाहिए। न कि उनकी खिल्ली उड़ाना चाहिए। अनुराग भदौरिया ने कहा कि जनता इस सरकार से दुखी है, आने वाले चुनावों में भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
कांग्रेस की नकल भी नहीं कर पाई भाजपा : कांग्रेस प्रवक्ता
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी कहते हैं कि यूपी सरकार सरकार ने किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर कांग्रेस की नकल करनी कोशिश की, लेकिन कर न सकी। केंद्र और प्रदेश की दोनों सरकार ने किसान कर्जमाफी के नाम पर किसानों को धोखा दिया है। उन्हें ठगा है। अंशू अवस्थी ने कहा कि केंद्र कि नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सिर्फ किसानों को ठगा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अपने घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने को कही थी, लेकिन सरकार बनने के बाद वादे से मुकर गई।
किसानों का अपमान कर रही सरकार : रालोद
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने जारी बयान में कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति पर आंसू बहाने का नाटक करती है और दूसरी ओर कर्जमाफी के नाम पर भद्दा मजाक करती है। उन्होंने कहा कि कई जिलों में किसानों को कर्ज माफी के नाम पर 08, 25, 55 और 238 रुपये का प्रमाणपत्र देकर उनका अपमान किया जा रहा है।
किसानों को सिर्फ चुनावी झुनझुना : किसान नेता
बुंदेलखंड के बड़े किसान नेता शिवनारायन परिहार कहते हैं कि कर्जमाफी के नाम पर सरकार ने किसानों को ठगा है। सिर्फ कर्जमाफी के तहत आने वाले किसानों की संख्या बढ़ाने के लिए उन्हें चुनावी झुनझुना पकड़ा दिया गया है।
Published on:
12 Sept 2017 02:33 pm

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