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UP Kisan Karz Mafi पर सीएम योगी का बड़ा फैसला, अब इन किसानों को नहीं मिलेगा ऋणमाफी सर्टिफिकेट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया में आ रही खबरों और किसानों की शिकायत के बाद किसान कर्जमाफी से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Sep 18, 2017

Yogi Adityanath

लखनऊ. किसान कर्जमाफी प्रमाण पत्र को लेकर मुख्यमंत्रयोगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब से किसानों को 10 हजार रुपए से कम कर्जमाफी का सर्टिफिकेट न जारी किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया में आ रही खबरों और किसानों की शिकायत के बाद यह फैसला लिया है। गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों में किसानों को 10 पैसे से 2 रुपए और 25, 30... रुपयों तक के कर्जमाफी सर्टिफिकेट बांटे गए। इसे लेकर मीडिया के जरिए किसानों की नाराजगी सामने आई तो विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार को किसान विरोधी बताते हुए जमकर शब्दबाण चलाए।

उत्तर प्रदेश में किसान कर्जमाफी का वादा कर सत्ता में आई भाजपा सरकार ने किसान कर्जमाफी का अपना वादा पूरा किया। भाजपा नेता इसे प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बता रहे थे। लेकिन जब किसान कर्जमाफी के पहले चरण में किसानों को ऋणमाफी के प्रमाण पत्र मिले तो उन पर अंकित धनराशि देखकर किसानों ने विरोध जताया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 10 हजार से कम राशि के कर्ज को माफ किया जाना जरूरी है, लेकिन उसका सर्टिफेटक जारी न किया जाए और न ही ऐसे किसानों को कर्जमाफी के कार्यक्रम में बुलाया जाए।

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यूपी में 86 लाख किसानों का होगा कर्जमाफ
उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली ही कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों के कर्जमाफी का ऐलान किया था। किसान कर्जमाफी कार्यक्रम का आगाज राजधानी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में ऋणमाफी सर्टिफिकेट बांटकर किया था। पहले चरण में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ऋणमाफी के नाम पर किसी का 10 रुपए कर्ज माफ हुआ तो किसी का 20, 30, 50, 100 या 200 रुपए। कड़ी धूप में घंटों इंतजार के बाद जब किसानों को ऋणमाफी प्रमाणपत्र मिले तो उनके चेहरे पर हताशा और सरकार के खिलाफ गुस्से के भाव साफ दिखे। मामले पर आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। प्रभारी मंत्री भी अन्नदाताओं के साथ हुए इस मजाक का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार सिर्फ किसानों का नंबर बढ़ाने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसा कर रही है।

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