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यूपी वालों ने छोड़ी कैश की आदत! 9 महीने में 1566 करोड़ बार चला UPI, टूट गए पेमेंट के सारे रिकॉर्ड

यूपी में डिजिटल पेमेंट ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जानें क्यों अब लोग जेब में कैश रखना छोड़ रहे हैं।
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लखनऊ

•

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Pratiksha Gupta

•

Apr 05, 2026

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UP Sets New Digital Payment Record | (फोटो सोर्स- gemini)

UP News Hindi: उत्तर प्रदेश की जनता अब जेब में कैश लेकर चलने के बजाय मोबाइल से पेमेंट करने पर ज्यादा भरोसा कर रही है। प्रदेश में डिजिटल लेनदेन के जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ कर रख दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के महज 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर) में ही यूपी में कुल 1635.72 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, जो बताता है कि अब चाय की टपरी हो या शोरूम, हर जगह लोग डिजीटल भुगतान करना ही पसंद कर रहे हैं।

UPI बना लोगों की पहली पसंद

लेनदेन के मामले में यूपीआई सबसे पॉपुलर माध्यम बनकर उभरा है। कुल डिजिटल लेनदेन में से करीब 1566 करोड़ ट्रांजैक्शन सिर्फ UPI और क्यूआर कोड के जरिए किए गए है। यानी लोग अब 10 रुपये की सब्जी से लेकर हजारों के सामान तक के लिए सीधे फोन से पेमेंट कर रहे हैं। जहां छोटे खर्चों के लिए यूपीआई पहली पसंद है, वहीं बड़े पेमेंट के लिए लोगों ने आईएमपीएस पर भरोसा जताया है।

शहरी इलाकों में बढ़ा कार्ड्स का क्रेज

सिर्फ UPI ही नहीं, बल्कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड का चलन भी तेजी से बढ़ा है, जहां कार्ड्स के जरिए लगभग 1.09 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह ट्रेंड ज्यादातर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहां लोग शॉपिंग और अन्य खर्चों के लिए कार्ड स्वाइप करना ज्यादा सेफ मान रहे हैं।

सरकारी बैंक या प्राइवेट? कौन किसमें आगे

  • पब्लिक सेक्टर बैंक: गांवों और कस्बों तक मजबूत नेटवर्क होने के कारण यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म पर सरकारी बैंकों का दबदबा है।
  • प्राइवेट सेक्टर बैंक: तकनीक और फास्ट सर्विस के मामले में प्राइवेट बैंक आगे हैं। आईएमपीएस, भारत क्यूआर और कार्ड पेमेंट में निजी बैंकों की पकड़ ज्यादा मजबूत दिखी है।

क्यों बढ़ रहा है डिजिटल पेमेंट का ग्राफ?

यूनियन बैंक के महाप्रबंधक ने एक मीडिया हाउस से कहा कि सरकाक के सहयोग और बैंकों के जागरूकता अभियानों की वजह से यूपी डिजिटल लेनदेन में नंबर वन पर है। जिसके पीछे कई कारण हैं-

  • हर हाथ में स्मार्टफोन और सस्ता इंटरनेट।
  • स्कैन और पे की आसान सुविधा।
  • कैश रखने की झंझट और डर से मुक्ति।
  • सुरक्षित ट्रांजैक्शन।

साल-दर-साल ऐसे बदली तस्वीर (करोड़ में)

  • 2018-19: 161.69
  • 2019-20: 189.07
  • 2020-21: 391.02
  • 2021-22: 426.68
  • 2022-23: 1174.32
  • 2023-24: 893.98
  • 2024-25: 1380.91
  • 2025-26 (दिसंबर तक): 1635.72