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यूपी से मुंह मोड़ रहे हैं प्रदेश के ही खिलाड़ी

उत्तर प्रदेश 20 करोड़ की आबादी वाला प्रदेश हैं। मगर अभावों के कारण लगातार लोगों का पलायन दूसरे राज्यों में हो रहा है।

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Abhishek Gupta

Aug 24, 2016

Players

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश 20 करोड़ की आबादी वाला प्रदेश हैं। मगर अभावों के कारण लगातार लोगों का पलायन दूसरे राज्यों में हो रहा है। रोज़गार का क्षेत्र हो या फिर खेल और शिक्षा यूपी के लोगों को दूसरा राज्य ही भा रहा है।

एथलेटिक कोच सुरेंद्र सिंह ने बताया की उत्तर प्रदेश सरकार की बेरुखी की वजह से अंतराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले खिलाड़ी अपने प्रदेश से मुंह मोड़ रहे हैं। एथलेटिक्स, हॉकी, वॉलीवॉल, क्रिकेट के स्टार खिलाडी दूसरे राज्यों का मान बढ़ा रहे हैं। इन खिलाडियों को दूसरे राज्यों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही नौकरी मिल रही है।

पुलिस को छोड़ दें तो यूपी के किसी भी सरकारी विभाग में खेल कोटा लागू नहीं है। लिहाज लन्दन ओलंपिक में तिरंगे का प्रतिनिधित्व करने वाली मेरठ की गरिमा चौधरी (जुडो), लखनऊ की सोनिया चानू (वेट लिफ्टिंग) रायबरेली की सुधा सिंह(एथलेटिक्स) ने अपने सुरक्षित भविष्य के लिए यूपी से किनारा कर लिया है। खेल कोटा लागू होने से रुकेगा पलायन। सीएम अखिलेश को इस ओर ध्यान देना होगा।

यूपी के यह खिलाड़ी खेल रहे हैं दूसरे राज्यों से

इति श्रीवास्तव(गोरखपुर)- अब मुम्बई से हॉकी खेल रही हैं
वर्तिका सिंह (गोरखपुर)-अब पंजाब से हॉकी खेल रही हैं
पूनम चौधरी(मुजफ्फर नगर)- अब कोलकाता वॉलीबॉल टीम में
देवेश चौहान (इटावा)-अब दिल्ली हॉकी टीम में
इंद्रजीत पटेल(इलाहाबाद)-अब देहरादून एथलेटिक्स
तुषार खांडेकर (झांसी)-अब भोपाल हॉकी टीम में
पंकज सिंह(सुल्तानपुर)-राजस्थान क्रिकेट टीम में
दिवाकर राम (गोरखपुर)-दिल्ली हॉकी टीम में
विवेक गुप्ता(इटावा)-अब दिल्ली हॉकी टीम में

काउंसलर अमृता दास ने बताया की रोज़गार के क्षेत्र में बात करें तो यूपी की राजधानी लखनऊ में ऐसा कुछ नहीं हैं जहां युवाओं को रोज़गार के अवसर मिले।बेरोजगार युवक मुम्बई, दिल्ली, बैंगलोर जैसे दूर दराज के शहर में रहने को मजबूर हैं। स्टूडेंट प्रोफेशनल कोर्स करके दूसरे स्टेट जाकर नौकरी कर रहे हैं। गरीब तबका खाड़ी के देशों तक नौकरी की तलाश में जा रहा है। यूपी में कोई ऐसी इंडस्ट्री भी नहीं आ रही जिससे लोगों को नौकरी मिले।

सरकारी टीचर की पोस्ट के लिए आज भी बीटीसी धारक अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकारी नौकरियों में पोस्ट है नहीं। मजबूरी ऐसी की सरकारी नौकरी पाने के लिए डिग्री धारकों ने तो सफाई कर्मचारियों के लिए निकले पद पर आवेदन कर डाला।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बात करें तो अधिकतर वैज्ञानिक और डॉक्टर दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। रिसर्च स्कॉलर्स को काम करने के लिए संसाधन ना मिलने की वजह मेडिकल और साइंस के क्षेत्र में भी लोग दूसरे राज्य में जा रहे हैं।