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पीएफआई पर बैन की यूपी पुलिस ने गृह मंत्रालय से की सिफारिश

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की यूपी में सीएए के लेकर हुई हिंसा में संलिप्तता के खुलासे के बाद यूूपी पुलिस इसे बैन करने की कवायद में जुट गई है।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Jan 09, 2020

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लखनऊ. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की यूपी में सीएए के लेकर हुई हिंसा में संलिप्तता के खुलासे के बाद यूूपी पुलिस इसे बैन करने की कवायद में जुट गई है। प्रदेश की पुलिस ने गृह मंत्रालय से इसे यूएपीए (अनलॉफुल अक्टिवीटीज प्रिवेंशन एक्ट) के सेक्शन- 3 के तहत बैन करने की सिफारिश की है। पीएफआई पर यूपी में दिसंबर 2019 की हिंसा से पूर्व भी कई मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन हिंसा के बाद पीएफआई पर सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। गृह मंत्रालय को भेजी गई सिफारिश में इस बात का जिक्र है। हिंसा में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की भूमिका के बारे में भी बताया गया है।

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गृह मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2010 में यूपी में पीएफआई और उसके सदस्यों के खिलाफ दो मुकदमे व 2017 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था, तो वहीं साल 2019 (सीएए हिंसा से पहले) में 4 मुकदमे दर्ज किए गए थे। सीएए हिंसा से पहले पीएफआई व उसके सदस्यों पर कुल 7 एफआईआर दर्ज थी, जिसमें 1 मामले में दोषी को सजा हो चुकी है, दो मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और 4 की जांच चल रही है। इन सभी मामलों में भड़काऊ पोस्टर, सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ कर माहौल खराब करने का आरोप है।

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