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चंद्रशेखर आजाद की बढ़ेंगी मुश्किलें, एक्स गर्लफ्रेंड ‘रोहिणी’ ने थामा अखिलेश का हाथ, 200 सभाओं का प्लान

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले रोहिणी घावरी समाजवादी पार्टी के साथ यूपी राजनीति में सक्रिय होने जा रही हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से बातचीत के बाद यह फैसला लिया।
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लखनऊ

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Anuj Singh

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Updated: 11 Apr 2026, 8:49 AM IST

चंद्रशेखर की एक्स गर्लफ्रेंड अब अखिलेश के साथ

चंद्रशेखर की एक्स गर्लफ्रेंड अब अखिलेश के साथ Source- Patrika

UP Politics: विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यूपी में बड़ी हलचल होने वाली है। डॉ. रोहिणी घावरी, जो भीम आर्मी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की एक्स गर्लफ्रेंड बताई जाती हैं, अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रूप से उतरने वाली हैं। वे स्विट्जरलैंड में नौकरी करती हैं, लेकिन जल्द ही भारत लौटकर समाजवादी पार्टी के साथ काम करेंगी। उन्होंने हाल ही में एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में यह जानकारी दी।

अखिलेश यादव से बातचीत

रोहिणी घावरी ने बताया कि 7 अप्रैल को सपा प्रमुख अखिलेश यादव से उनकी फोन पर बात हुई थी। सबसे पहले उन्होंने अखिलेश जी से पूछा कि क्या वे चंद्रशेखर आजाद के साथ गठबंधन करेंगे। अखिलेश यादव ने साफ जवाब दिया कि "कभी नहीं"। इसी वजह से रोहिणी सपा का साथ देने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने 8 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "चलो बुलावा आया है, उत्तर प्रदेश से बड़े भैया ने बुलाया है। अगले महीने से शुरू होंगी 200 बैठकें। आप सब तैयार हो जाइए, नई ऊर्जा के साथ आपकी बहन आपके साथ होगी।"

जून में भारत लौटकर प्लान

रोहिणी घावरी जून महीने में स्विट्जरलैंड से भारत वापस आएंगी। उसके बाद वे पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 200 छोटी-बड़ी सभाएं करेंगी। इन सभाओं का मुख्य फोकस नॉन जाटव दलित समाज पर होगा, खासकर वाल्मीकि और पासी समुदाय को एकजुट करना। इसके बाद आगरा या लखनऊ में एक बड़ी रैली का आयोजन होगा, जिसमें अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। रोहिणी कहती हैं कि वे लखनऊ को केंद्र बनाकर पूरे यूपी में दलित समाज के लोगों तक पहुंचेंगी।

चंद्रशेखर पर हमले

रोहिणी घावरी लगातार चंद्रशेखर आजाद पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि चंद्रशेखर को वोट देना मतलब बीजेपी को वोट देना है। यह बात उत्तर प्रदेश के दलितों को समझाने आ रही हूं। यह आदमी बीजेपी को जीताने के लिए दिन-रात काम कर रहा है, गुमराह ना हो। वे चंद्रशेखर की 'कथित दलित मूवमेंट' की सच्चाई जनता के सामने लाना चाहती हैं। रोहिणी का कहना है कि यूपी में दलितों की कुल आबादी करीब 20-21 प्रतिशत है। इसमें से लगभग 12 प्रतिशत जाटव और 10 प्रतिशत नॉन जाटव दलित हैं। नॉन जाटव दलितों में पासी समाज की आबादी सबसे ज्यादा (करीब 65 लाख) है, जबकि वाल्मीकि समाज में करीब 13.19 लाख लोग हैं। ये दोनों समुदाय सफाई कर्मचारी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी पिछड़े हुए हैं। दलित राजनीति के नाम पर सिर्फ जाटव समाज को फायदा मिला, जबकि बाकी उपजातियां हाशिए पर रहीं।

टीम बनाने की तैयारी

रोहिणी घावरी अभी तीन दिन के लिए इटली जा रही हैं। वहां अपने लोगों के साथ बैठक करके अपनी टीम बनाएंगी और आगे की प्लानिंग करेंगी। इटली के बाद वे पेरिस भी जाएंगी और कुछ लोगों से मुलाकात करेंगी। वे एक साल तक यूपी में सक्रिय रहेंगी। रोहिणी ने कहा कि वाल्मीकि और पासी समुदाय के कई नेताओं से उनकी बात हो चुकी है। वे सब उनके साथ जुड़ने को तैयार हैं। साथ ही, अपने एनजीओ के जरिए हाशिए पर जी रहे समाज को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

यूपी पर राजनीतिक असर

रोहिणी घावरी की ये गतिविधियां चंद्रशेखर आजाद की राजनीति पर असर डाल सकती हैं। अगर वे सभाओं के जरिए चंद्रशेखर पर हमला बोलेंगी, तो सहानुभूति के चलते नॉन जाटव दलित उनके साथ जुड़ सकते हैं। इससे नॉन जाटव दलितों का भाजपा और सपा जैसे दलों में बंटा वोट और बंट सकता है, जिससे चंद्रशेखर की ताकत कमजोर हो सकती है। रोहिणी घावरी का कहना है कि वे अपने समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पूरी मेहनत करेंगी।

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