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यूपी के बच्चे पढऩे लिखने की उम्र में पी रहे हैं सिगरेट

उत्तर प्रदेश के 23 फीसदी छात्र हाईस्कूल तक पहुंचते-पहुंचते सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं। या फिर किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबल यंग टोबैको सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि हाईस्कूल तक के तीन में से एक छात्र सिगरेट का लती हो चुका होता है।

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महेंद्र प्रताप सिंह
भारत में सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट पीने पर प्रतिबंध है। फिर लोग सिगरेट पीते हैं। सिगरेट पीकर फेफड़े खराब करते हैं। और असमय 10 लाख लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। तंबाकू से कैंसर होता है, या फिर तंबाकू से दर्दनाक मौत होती है। इस तरह की चेतावनी सिगरेट के पैकेट पर लिखी भी होती है। राष्ट्रीय तंबाकू मुक्त सेवा केंद्र तंबाकू के नुकसान के बारे में जागरूकता भी पैदा करता है। इन तमाम उपायों और चेतावनियों के बावजूद यह खबर चिंतनीय है कि उत्तर प्रदेश के 23 फीसदी छात्र हाईस्कूल तक पहुंचते-पहुंचते सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं। या फिर किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबल यंग टोबैको सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि हाईस्कूल तक के तीन में से एक छात्र सिगरेट का लती हो चुका होता है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि अब लड़कियां भी धुंआ फूंकने में पीछे नहीं हैं।

खास बात यह है कि संस्था ने यह सर्वेक्षण 13 से 15 साल के बच्चों के बीच किया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष यही हैं कि 37 फीसदी छात्र घर में ही सिगरेट की पहली कश लेते हैं। मतलब पिता या परिवार का कोई सदस्य जो बच्चों के सामने सिगरेट पी रहा होता है, उनसे वह प्रेरित होता है। करीब 20 फीसदी छात्र सिगरेट की पहली कश अपने दोस्तों के घर लेते हैं। नौ फीसदी छात्रों ने सामाजिक समारोहों जैसे शादी-विवाह आदि जगहों पर सिगरेट पीने की आदत पकड़ी। इसी तरह करीब तीन प्रतिशत लड़कियां भी 13 से 15 साल की उम्र में सिगरेट का लुत्फ उठा चुकी होती हैं।

उप्र में बड़ी संख्या उन लोगों की भी जो पैसिव स्मोकिंग की वजह से फेफड़े संबंधी बीमारियों के शिकार हैं। पैसिब स्मोकिंग यानी जब एक शख्स सिगरेट पी रहा होता है तब उसके आसपास के लोगों को अनायास ही धुंआ लेना पड़ता है। एक लाख लोगों में सात लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग की वजह से होती है। रिपोर्ट बताती है कि बचपन में सिगरेट के लती 27 फीसदी बच्चों में आगे चलकर मस्तिष्क आघात और 42 प्रतिशत में फेफड़े की गंभीर बीमारियां होती हैं।

तमाम बच्चे सिगरेट से आगे बढ़कर ई सिगरेट के लती बनते हैं। हालांकि यह तंबाकू वाले सिगरेट से कम नुकसानदेह है लेकिन है तो बुरी लत ही। बच्चों का भविष्य बचाना है तो अभिभावकों को चाहिए कि घर में सिगरेट पीने ेसे बचें। अव्वल तो धूम्रपान करें ही नहीं, फिर भी लत नहीं छोड़ पा रहे हैं तो बच्चों को इससे दूर रखने की कोशिश करें। कैंसर और अन्य जानलेवा बीमारियों से बचने का यही एकमात्र उपाय है।

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