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59 साल पहले जब यूपी विधानसभा में लगी थी अदालत, केशव को मिली थी 7 दिन की जेल, जानिए वह किस्सा

59 साल पहले जब यूपी विधानसभा कोर्ट में बदल गया था। सदन ने सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता केशव को 7 दिन की जेल की सजा सुनाई गई थी। इसी मामले में हाईकोर्ट और सदन भी आमने- सामने आ गए थे। यह पूरा वाक्या क्या था? आइए जानते हैं।

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लखनऊ

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Anand Shukla

Mar 04, 2023

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उत्तर प्रदेश विधानसभा ने कल यानी शुक्रवार को पूर्व डीएसपी समेत छह पुलिस‍कर्मियों को सदन में बुलाकर सजा सुनाई। विधानसभा की अदालत ने जिन पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है। उनमें कानपुर नगर में बाबूपुरवा के तत्कालीन सीओ अब्दुल समद, किदवई नगर तत्कालीन एसएचओ श्रीकांत शुक्ला, तत्कालीन उप निरीक्षक त्रिलोकी सिंह, कांस्टेबल छोटे सिंह, विनोद मिश्रा और मेहरबान सिंह शामिल हैं।

इन पर आरोप लगा था कि 15 सितंबर, 2004 को बीजेपी विधायक विश्नोई की पिटाई की थी। विश्नोई कानपुर में बिजली कटौती के खिलाफ जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपने जा रहे थे तब पुलिस कर्मियों ने उनकी पिटाई की थी।

विधानसभा में बने कटघरे में ये आरोपी पहले काफी देर तक खड़े रहे, बाद में एक दिन की जेल की सजा सुनाई गई। स्पीकर सतीश महाना ने फैसले की घोषणा की और कहा, “पुलिसकर्मी आधी रात तक विधानसभा भवन के एक कमरे में कैद रहेंगे और उनके लिए भोजन और अन्य सुविधाओं जैसी सभी व्यवस्था की जाएंगी।”

59 साल बाद फिर बनी यूपी विधानसभा अदालत

1964 में सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता केशव सिंह को 7 दिन के लिए जेल भेजा गया था। केशव सिंह ने कांग्रेस विधायक नरसिंह पांडेय के खिलाफ सदन के गलियारों में भष्ट्राचार के पोस्टर लगाए थे। विशेषाधिकार समिति ने केशव को तलब किया तो उन्होंने आने से मना कर दिया।

14 मार्च, 1964 को समिति ने केशव को अवमानना का दोषी मानते हुए सदन में पेश होने को कहा। जब केशव को मार्शल गोरखपुर से लेकर लखनऊ पहुंचे तब वह स्टेशन पर ही लेट गए। मार्शल ने केशव को वहां से उठाकर सदन में लाए। इसके बाद विधानसभा स्पीकर मदन मोहन वर्मा ने केशव से नाम और आरोप पूछा तो उन्होंने कुछ नहीं बोला।

केशव ने नहीं मांगी माफी

11 मार्च 1964 को केशव का लिखा पत्र सदन में पढ़ा गया। जिसमें उन्होंने सदन पर कई आरोप लगाए थे। केशव ने यह माना चिट्ठी उनकी है। स्पीकर ने सजा सुनाने से पहले केशव से कहा कि अगर हाथ जोड़कर माफी मांग लो, तो सजा माफ कर दी जाएगी। केशव सिंह अपने बात पर अड़े रहे।

इसके बाद उन्हें 7 दिन का कारावास के लिए जिला जेल भेजने का आदेश दिया गया। केशव को सजा मिलने के बाद मार्शल ने चलने को कहा तो वह वेल में ही लेट गए। इसके बाद उन्हें उठाकर ले जाना पड़ा।

जज और स्पीकर हुए आमने- सामने

केशव 6 दिन की सजा जेल में काट चुके थे। इसके बाद 19 मार्च को उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाई कोर्ट के दो जज नसीरुल्ला बेग और जीडी सहगल ने जमानत दे दी। इसके बाद स्पीकर नाराज हो गए और दोनों जजों को गिरफ्तार करके सदन में पेश होने का वारंट जारी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी सजा

जजों ने गिरफ्तारी रोकने के लिए खुद हाईकोर्ट पहुंचे। 28 जजों की बेंच बैठी और गिरफ्तारी का आदेश रद्द कर दिया। हंगामा मचने पर विधानसभा ने भी गिरफ्तारी का वारंट वापस ले लिया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां पर हाईकोर्ट के जजों का सम्मान सुरक्षित रहा और विधानसभा का भी। सुप्रीम कोर्ट ने केशव सिंह की जमानत रद्द की और 7 दिन की सजा बरकरार रखी।