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उर्दू,अरबी,फारसी के साथ संस्कृत भी पढ़ाएगा ये यूनिवर्सिटी

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी यूनिवर्सिटी में अगले सेशन से बीटेक की पढ़ाई शुरू करेगा। उर्दु,अरबी, फारसी के साथ संस्कृत भी पढाई जाएगी...

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लखनऊ. राजधानी स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी यूनिवर्सिटी में अगले सेशन से बीटेक की पढ़ाई शुरू करेगा। इसके लिए यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने तैयारी कर ली है। शुरुआत में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई होगी। इसके अलावा संस्कृत भाषा और पीएचडी के कोर्स भी चलाए जाएंगे। इन दोनों कोर्सों के लिए जरूरी पदों के सृजन का प्रस्ताव यूनिवर्सिटी प्रशासन प्रदेश सरकार के पास भेज चुका है।

यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा ने बताया कि उनका सारा ध्यान व्यवसायिक और रोजगारपरक कोर्स शुरू करने पर है। इसको पूरा करने की योजना बनाई है। इसके तहत ही बीटेक का कोर्स चलाने का फैसला किया है। इस सम्बन्ध में प्रस्ताव तैयार है। कार्यपरिषद के नए सदस्यों की प्रतीक्षा है। इनके नियुक्त होते ही कार्यपरिषद की बैठक बुलाकर बीटेक कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को पास कराएंगे। साथ ही उर्दू अरबी फारसी के बाद संस्कृत भाषा में पढ़ाई शुरू की जा रही है। इसके लिए जरूरी संस्कृत भाषा लैब तैयार की जाएगी। संस्कृत विभाग का गठन किया जा रहा है। विभाग के लिए जरूरी पदों के सृजन का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेज दिया है। उक्त दोनों कोर्स नए शैक्षिक सत्र से ही चलेंगे।

प्रो. माहरूख ने बताया कि सबसे पहले बीटेक कोर्स सिविल ब्रांच में शुरू किया जाएगा। इसके बाद संसाधनों की उपलब्धता के हिसाब से ब्रांच बढ़ाई जाएंगी। सिविल में कुल 60 सीटें निर्धारित होंगी। प्रयास यहीं है कि यह कोर्स रेगुलर के रूप में चले। इसमें दाखिले राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षा से होंगे

मार्कशीट पर होगा क्यू-आर कोड

यूनिवर्सिटी अपनी मार्कशीट और अधिक सुरक्षित करेगा। इसके तहत स्टूडेंट्स को क्यूआर कोड युक्त मार्कशीट बांटी जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.माहरूख मिर्जा ने बताया कि विद्यार्थियों की अंकतालिका उच्च सुरक्षा उपायों से लैस होगी। पहली बार अंकतालिका को क्यूआर कोड से लैस किया जा रहा है। इससे एक ओर जहां अंकतालिका को फर्जी बनाने की संभावना कम होगी, तो वहीं दुनिया के किसी भी कोने में इसकी प्रमाणिकता की जांच की जा सकेगी। प्रो. मिर्जा ने बताया कि अभी तक पहले सेमेस्टर की अंक तालिका के लिए पांचवें सेमेस्टर तक प्रतीक्षा करनी होती थी। समय से अंक तालिका नहीं मिलती थी, लेकिन अब परिणाम जारी होने के बाद तुरन्त विद्यार्थी को अंकतालिका मिलेगी