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UP Darshan: लखनऊ के यूपी दर्शन पार्क में कचरे से बनी कला ने ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल का दिल जीता

From Waste to Wonder: लखनऊ के यूपी दर्शन पार्क में आयरन वेस्ट से बने झांसी का किला, ताजमहल और राम मंदिर जैसे भव्य प्रतिरूप ब्राज़ील के प्रतिनिधिमंडल के लिए एक आकर्षक दृश्य बने। अंतरराष्ट्रीय अतिथियों ने इस पहल की रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास मॉडल की खुले दिल से सराहना की।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 22, 2026

ब्राज़ील के प्रतिनिधिमंडल ने यूपी दर्शन पार्क में देखा कचरे से कला बनने का अद्भुत उदाहरण (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

ब्राज़ील के प्रतिनिधिमंडल ने यूपी दर्शन पार्क में देखा कचरे से कला बनने का अद्भुत उदाहरण (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

UP Darshan Park: नवाचार, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लखनऊ नगर निगम की एक अनूठी पहल आज वैश्विक मंच पर सराही जा रही है। ब्राज़ील के साओ पाओलो राज्य के पिकेटे शहर से आए मेयर के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ स्थित यूपी दर्शन पार्क का भ्रमण कर “वेस्ट टू वंडर” मॉडल को करीब से देखा और उसकी खुले दिल से प्रशंसा की। यह दौरा न केवल अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का प्रतीक बना, बल्कि लखनऊ की सतत विकास सोच को भी विश्व पटल पर स्थापित करता नजर आया।

कचरे से संस्कृति की भव्य अभिव्यक्ति

यूपी दर्शन पार्क में प्रवेश करते ही प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उस समय आश्चर्यचकित रह गए, जब उन्होंने झांसी का किला, ताजमहल, बांके बिहारी मंदिर और अयोध्या के राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के भव्य प्रतिरूप देखे। खास बात यह रही कि ये सभी संरचनाएं आयरन वेस्ट और स्क्रैप सामग्री से निर्मित हैं, जिन्हें लखनऊ नगर निगम ने बेकार समझे जाने वाले कचरे से कला के रूप में ढाला है।

इन प्रतिरूपों की बारीक नक्काशी, संरचनात्मक मजबूती और ऐतिहासिक सटीकता ने विदेशी अतिथियों को गहराई से प्रभावित किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि यह परियोजना न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।

“वेस्ट टू वंडर” - विचार से पहचान तक

नगर निगम द्वारा शुरू की गई “वेस्ट टू वंडर” पहल का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना है कि कचरा भी संसाधन बन सकता है। पार्क में प्रदर्शित संरचनाएं यह साबित करती हैं कि सही सोच, तकनीक और इच्छाशक्ति से बेकार सामग्री को उपयोगी और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।

इस पहल के माध्यम से जहां एक ओर लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। यूपी दर्शन पार्क आज लखनऊ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की सराहना

ब्राज़ील से आए प्रतिनिधिमंडल ने इस परियोजना को सतत विकास (Sustainable Development) का बेहतरीन मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें दुनिया के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने लखनऊ नगर निगम के अधिकारियों से इस मॉडल की कार्यप्रणाली, लागत, सामग्री चयन और रखरखाव से जुड़े सवाल पूछे और इसे अपने देश में लागू करने की संभावना भी जताई।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चरनजीत गांधी, उपनेता पार्षद दल भाजपा सुशील तिवारी ‘पम्मी’, कार्यकारिणी सदस्य/पार्षद गौरी सांवरिया, पार्षद सौरभ सिंह ‘मोनू’ और पार्षद रीता राय की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

नगर निगम प्रशासन की ओर से नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में इस पहल को लखनऊ की पहचान बताते हुए भविष्य में ऐसे और प्रोजेक्ट्स शुरू करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम

यूपी दर्शन पार्क केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरणीय शिक्षा का केंद्र भी बन चुका है। यहां आने वाले स्कूली छात्र, युवा और आम नागरिक यह सीखते हैं कि किस प्रकार पुनर्चक्रण (Recycling) और पुनः उपयोग (Reuse) से पर्यावरण को बचाया जा सकता है। यह पहल “स्वच्छ भारत मिशन” और “ग्रीन सिटी” की अवधारणा को भी मजबूती प्रदान करती है।

लखनऊ: जहां कचरा बनता है कला

लखनऊ ने यह साबित कर दिया है कि नवाबों का शहर अब केवल अपनी तहज़ीब और इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि नवाचार और सतत विकास के लिए भी जाना जाएगा। यूपी दर्शन पार्क में कचरे से बनी ये संरचनाएं आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव हैं।

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