
विश्व की सबसे प्राचीन प्रसिद्ध नगरी काशी जहां बाबा विश्वनाथ का ज्योतिर्लिंग है। काशी को बनारस और वाराणसी भी कहते हैं। गंगा के किनारे बसे इस नगर में देखने लायक बहुत कुछ है। नए साल में आप यहां भी जा सकते हैं।

गंगा के किनारे स्थित सभी तीर्थों में श्रेष्ठ है प्रयागराज। इसे पहले इसे इलाहाबाद कहते थे। यहां गंगा और यमुना का मिलन होता है और सरस्वती को यहां अदृश्य माना गया है। त्रिवेणी के इसी स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है। यहां हजारों वर्ष से मैजूद है अक्षयवट और सभी संतों के मठ और आश्रम। घूमने के लिए यह भी सबसे अच्छी जगह मानी जाती है।

सरयू नदी के किनारे सप्तपुरियों में से एक अयोध्या भारत की सबसे प्राचीन नगरी है जहां प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था। बता दें अथर्ववेद में अयोध्या को 'ईश्वर का नगर' बताया गया है। भगवन श्रीराम की नगरी तो अभी घूमने लायक है। इस नए साल में आप अपने परिवार के साथ यहां भी जा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश का कुशीनगर एक बौद्ध तीर्थ स्थल है। यह भी प्राचीन नगरी है जहां देखने के लिए कई धार्मिक स्थल है। यहां भगवान बुद्ध ने अपने अंतिम उपदेश दिए थे। यह भी घूमने की सबसे अच्छी जगह है। आप यहां भी जा सकते हैं।

प्राचीन नगर सारनाथ, बौद्ध धर्म के लिए बहुत महत्व का स्थान है। सारनाथ वाराणसी शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर पूर्व की दिशा में है। बौद्ध धर्म के अलावा सारनाथ में हिंदू धर्म और जैन धर्म के बीच कई विशाल मंदिर देखने को मिलते हैं जिन्हें किसी काल में नष्ट कर दिया गया था। यह भी घूमने की सबसे अच्छी जगह है। आप यहां भी जा सकते हैं।

चित्रकूट वही स्थान हैं जहां भगवान राम, लक्ष्मण और मां सीता के साथ रुके थे। चित्रकूट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दर्शनीय स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां पर हनुमान धारा, राम धारा, जानकी कुण्ड, कामादगिरी आदि देखने लायक स्थान है।

वृंदावन श्रीकृष्णी की लीला भूमि है। यहां पर बांके बिहारीजी का मंदिर है। इसके अलावा रंगनाथ मंदिर, केशी घाटी, गोविंद देव मंदिर, प्रेम मंदिर, हरे रामा हरे कृष्ण मंदिर, इस्कॉन मंदिर, पागल बाबा मंदिर आदि अनेक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है। इस नए साल में आप अपने परिवार के साथ यहां भी जा सकते हैं।

गंगा नदी के तट पर मौजूद, विंध्याचल भारत का एक प्रमुख शक्ति पीठ मंदिर है। विंध्याचल, वाराणसी से लगभग 70 किमी की दूरी पर मौजूद है। शास्त्रों के अनुसार, इसे शहर को देवी दुर्गा का निवास स्थान भी माना जाता है। माता रानी का दर्शन करने के लिए नए साल में आप यहां भी जा सकते हैं।