कई साल तक चले आंदोलन के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड को अलग राज्य के तौर पर पहचान मिली थी। उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड बना था।
22 साल पहले, 9 नवंबर 2000 में देश को सत्ताइसवां राज्य मिला था। उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिम हिस्से को अलग उत्तराखंड राज्य के तौर पर राज्य का दर्जा मिला। उत्तर प्रदेश के बंटवारे यानी उत्तराखंड के बनने में कई लोगों के अहम किरदार रहे। जिसमें सबसे दिलचस्प नाम है उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव का।
उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिम के जिलों के लोग कई साल से अलग राज्य की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन ने 90 के दशक में सबसे ज्यादा जोर पकड़ा। इस दशक में मुलायम सिंह का यूपी की राजनीति में बड़ा नाम था। ऐसे में उनका उत्तराखंड को लेकर क्या सोचना था, ये बहुत मायने रखता था।
मसूरी का गोलीकांड और मुजफ्फरनगर कांड के चलते मुलायम सिंह को उत्तराखंड का विलन कहा गया। दूसरी ओर सपा के नेता मुलायम सिंह को सबसे पहले उत्तराखंड की मांग मानने वाला भी कहते रहे।
मुलायम सिंह सरकार में हुए थे दो बड़़े कांड
साल 1994 में उत्तराखंड की मांग को लेकर आंदोलन अपने चरम पर था। इस दौरान राज्य के सीएम मुलायम सिंह यादव थे। मुलायम सिंह यादव राज्य के बंटवारे के पक्ष में नहीं थे। फिर इसी साल दो ऐसे कांड हुए जो बहुत दुखदायी थे।
1994 में 2 सितंबर को मसूरी में पुलिस ने आंदोलकारियों पर गोली चलाकर 6 लोगों को मार डाला था। इसे मसूरी कांड के नाम से जाना गया। इसने आंदोलन को और उग्र कर दिया। इसके बाद आंदोलनकारी अपनी मांग को लेकर दिल्ली जाने के लिए निकल गए।
दिल्ली के लिए निकले आंदोलनकारी 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर पहुंचे तो उनको शहर के बाहर रोक लिया गया। दो अक्टूबर की रात इन आंदोलनकारियों पर पुलिस की ओर से हर तरह की बर्बरता की गई। कई लोगों को मार दिया गया, महिलाओं के साथ भी ज्यादतियां हुईं।
इन दो घटनाओं ने मुलायम सिंह को उत्तराखंड के लोगों के बीच एक विलेन की तरह स्थापित कर दिया। यही वजह रही कि 2000 में उत्तराखंड बनने के बाद समाजवादी पार्टी कभी भी वहां ताकत नहीं बन सकी।
मुलायम सिंह यादव ने ही बनाई थी उत्तराखंड गठन के लिए पहली कमेटी
मुलायम सिंह यादव को उत्तराखण्ड विरोधी के तौर पर ही हमेशा जाना गया लेकिन ये भी दिलचस्प पहलू है कि मुलायम सिंह ने ही सबसे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में पृथक उत्तराखण्ड के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजा था।
मुलायम सिंह ने प्रस्ताव के लिए कमेटी भी बनाई थी। ये कमेटी कैबिनेट मंत्री रामाशंकर कौशिक की अध्यक्षता में बनी थी।