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लॉकडाउन में गांव, खेत और खलिहान : खेतों में खड़ी है फसल, लॉकडाउन में रास्ते में फंसे हारवेस्टर, कैसे कटे गेहूं

- किसानों की मांग कृषि यंत्रों की सर्विसिंग के लिए खुले दुकानें- गेहूं कटाई के लिए पंजाब से आने दें हारवेस्टर चालकों को- मंडी तक नहीं पहुंच पा रही सब्जियां, खेतों में हो रहीं नष्ट- सरकार के फरमान की वजह से खेती-किसानी का भी काम ठप- पशुओं के लिए चारे की भी गंभीर समस्या

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लखनऊ

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Neeraj Patel

Apr 01, 2020

लॉकडाउन में गांव, खेत और खलिहान :  खेतों में खड़ी है फसल, लॉकडाउन में रास्ते में फंसे हारवेस्टर, कैसे कटे गेहूं

लॉकडाउन में गांव, खेत और खलिहान : खेतों में खड़ी है फसल, लॉकडाउन में रास्ते में फंसे हारवेस्टर, कैसे कटे गेहूं

पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट
लखनऊ. पूरे देश में वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर 14 अप्रेल तक लॉकडाउन है। लोग घरों में कैद हैं। लेकिन, ग्रामीण इलाकों की बहुत बड़ी आबादी न चाहते हुए भी खेत और खलिहानों में है। किसानों और ग्रामीणों को अपने साथ ही अपने मवेशियों की चिंता है। अपने पेट के साथ-साथ पशुओं के चारे की भी व्यवस्था करनी है। इसलिए उनका खेतों तक निकलना मजबूरी है। लेकिन सरकार की पाबंदी से सभी काम ठप हैं। गेहूं कटाई के लिए पंजाब से हारवेस्टर भी अभी तक नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में फसलें कैसे कटेंगी इसकी चिंता में किसान हलाकान हैं। लॉकडाउन में पत्रिका टीम ने यूपी के कई जिलों में ग्रामीण इलाकों का जायजा लिया। पेश है हकीकत बयां करती रिपोर्ट-

गांवों में कोरोना का उतना खौफ नहीं है जितना शहरी इलाकों मे है। लोग जागरूक हैं। उन्हें पता है कि कोरोना एक दूसरे को छूने से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। लेकिन इन दिनों रबी की तमाम फसलें पक कर तैयार हैं। इसलिए किसानों को खेत-खलिहानों में निकलना मजबूरी है। लोग सोशल डिस्टेंसिंग का कहीं आंशिक पालन हो रहा है तो कहीं नहीं।

अभी गेहूं की कटाई में वक्त

गांवों में गेहूं की फसल पककर तैयार है। लेकिन अभी कटाई में वक्त है। ओलावृष्टि और बारिश की वजह से फसल पकने में समय लेगी। प्रतापगढ़ के किसानों ने बताया कि 15 अप्रेल तक फसल पूरी तरह पके जाएगी। तब कटाई की जाएगी। अभी जौ, मटर और चना की फसल कटने को तैयार है। सरसों की कटाई ज्यादा जरूरी है। अन्यथा इसकी फली खेतों में ही गिर जाएगी। इसलिए किसान सरसों और अलसी जैसी तिलहन को काट रहे हैं।

नहीं मिल रहे मजदूर

प्रयागराज के किसान रामराज ने बताया कि कोरोना खौफ की वजह से गांवों में भी मजदूर नहीं मिल रहे हैं। हर बार मार्च के अंत तक गांवों में पंजाब से हारवेस्टर आ जाते थे जो कई-कई एकड़ फसल एक साथ काट देते थे। लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से यह नहीं आ पाए हैं ऐसे में दिक्कत होगी। किसानों को चिंता है कि हारवेस्टर से कटाई हुई तो पशुओं के चारे के इंतजाम कैसे होगा। क्योंकि हारवेस्टर तो गेहूं की बाली ही काटता है भूसा खेत में ही रह जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से मजदूर भी नहीं मिल रहे। ऐसे में गेहूं कैसे कटेगा इसकी चिंता है।

दुकान न खुलने से कृषि यंत्रों की सर्विसिंग बंद

आजमगढ़ के किसानों ने अपना दुख बयां करते हुए कहा कि हम प्राकृतिक आपदा से उबर भी नहीं पाए थे किअ लॉकडाउन ने हमारी मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। फसल पक कर तैयार है लेकिन कटाई के लिए मजदूर और मड़ाई के लिए मशीन नहीं मिल रही है। हारवेस्टर चालक अभी तक नहीं आए। उधर, ट्रैक्टर और अन्य कृषि वाहनों की सर्विसिग भी नहीं हो पा रही।

35 फीसद फसल पहले ही बर्बाद

बाराबंकी के किसानों ने बताया कि इस बार रबी की फसल काफी अच्छी थी लेकिन फरवरी में हुई बारिश, चक्रवाती तूफान और ओलावृष्टि ने 30 से 35 प्रतिशत फसल बर्बाद कर दिया है। सरसों, मटर, जौ, गेंहू और चना की फसल पककर तैयार काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। कंबाइन भी धोखा दे रही है। अभी तक पंजाब से सिर्फ दस प्रतिशत कंबाइन चालक ही यूपी पहुंचे हैं। बार्डर सील होने के कारण इन्हें यूपी आने में परेशानी हो रही है।

खेतों में ही झडऩे लगी सरसों

सीतापुर के किसानों ने बताया कि सरसों और जौ की फसल खेतों में ही झडऩे लगी है। लॉकडाउन के चलते कृषि यंत्र पार्ट की दुकानें भी बंद हैं। कृषि यंत्रों के उपयोग से पहले सर्विस जरूरी है। लेकिन दुकानें बंद हैं। ऐसे में मड़ाई में दिक्कत हो रही है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। कम से हर बाजार में एक दुकान तो खोलनी चाहिए ताकि वाहनों की सर्विस हो सके।

बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा टमाटर

मिजार्पुर के किसानों के अनुसार लॉकडाउन के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं। टमाटर की फसल खेत से बाजार तक नहीं पहुंच पा रही। यहां की राजकुमारी का कहना है कि पांच हजार रुपये के टमाटर की फसल का हर रोज नुकसान हो रहा है। खेत में ही टमाटर सड़ रहा है।