
लखनऊ. इतिहास की किताब बताती है कि वाजिद अली शाह अवध के आखिरी नवाब थे लेकिन सच्चाई शायद इससे भी आगे है। कोलकाता की तंग गलियों के बीच उम्र के आखिरी पड़ाव पर उम्मीद के साथ एक चेहरा सामने आया है। दावा किया गया है कि यह व्यक्ति ही अवध का आखिरी नवाब है। खुद को वाजिद अली शाह का करीबी वंशज बताने के साथ किसी संपत्ति या मुआवजा नहीं मांगा गया है। अरदास सिर्फ इतनी है कि जिंदगी के शेष दिनों में नवाबों जैसा सम्मान मिलना ही चाहिए। बहरहाल, ‘अंतिम नवाब’ की इकलौती बेटी अपने पिता के हक के लिए मोर्चा संभाले है।
अली रजा की मौत के बाद सामने आए
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, कोलकाता की रहने वाली मंज़िलात फातिमा का दावा है कि उनके पिता काकुब कुद्र मिर्जा ही वाजिद अली शाह के आखिरी वंशज हैं। वह 88 वर्षीय हैं और कोलकात में रहते हैं। उनके हक के लिए उन्होंने गृह मंत्रालय को पत्र भी लिखा है। उनकी अपील है उनके पिता को नवाबों जैसा सम्मान मिले। दरअसल पूरा विवाद तब सामने आया जब दिल्ली में अली रजा नाम के व्यक्ति की मृत्यु हो गई। कहा जाता था कि वे ही नवाब वाजिद अली शाह के आखिरी वंशज थे।
गुमनामी में हुई मृत्यु
पिछले करीब 30 वर्षों से प्रिंस अली रज़ा इसी मालचा महल में रहते थे। नवाब का खौफ इतना था कि 30 वर्षों से इस महल में वही आदमी जा पाया जिसे आने की इजाज़त अली रज़ा ने दी. अवध के आखिरी राजकुमार की मौत 2 सितंबर 2017 को मालचा महल में हो गई थी लेकिन किसी को भी उनकी मौत का पता नहीं चला और कहीं कोई खबर नहीं बनी। तेज़ रफ़्तार से भागने वाले महानगर में वाजिद अली शाह के वंशज की ऐसी गुमनाम मौत होगी इसका किसी को अंदाजा नहीं था।
विदेशी अखबार में छपी थी रिपोर्ट
मालचा महल में गैस का कनेक्शन भी नहीं था। प्रिंस अली रज़ा खुद मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी जलाकर खाना बनाया करते थे। मालचा महल के सच को जानने के लिए हमने काफी रिसर्च किया। इस दौरान हमें आज से 36 वर्ष पुरानी एक न्यूज रिपोर्ट मिली जो न्यू यॉर्क टाइम्स ने 9 सितंबर 1981 को छापी थी।
इस रिपोर्ट में लिखा है कि प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने प्रिंस अली रज़ा की मां बेगम विलायत महल की मदद की थी और उन्हें रहने के लिए श्रीनगर में एक महल दिलवाया था लेकिन बेगम की किस्मत खराब थी साल 1971 में वहां कुछ लोगों ने महल को जला दिया। इसके बाद बेगम विलायत महल अपने 2 बच्चों और कुछ नौकरों के साथ नई दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर आ गईँ। बेगम की जिद थी कि रहेंगे तो सिर्फ महल में और यही इच्छा इस पूरे परिवार को मालचा महल तक खींच लाई लेकिन एक-एक करके इसी मालचा महल में ये पूरा शाही परिवार गुमनाम मौत का शिकार हो गया।
कोलकाता में तीन परिवार, शेष वंशज लखनऊ में
ऐसा कहा जाता है कि कोलकाता में तीन परिवार रहते हैं जो खुद को वाजिद अली शाह का वंशज कहते हैं। वहीं कुछ परिवार लखनऊ में भी हैं। मंज़िलात फातिमा का कहना है कि हमें हमारा अधिकार चाहिए। काकुब के पिता तीन भाई थे जिनमें से दो की मृत्यु हो गई है। अभी काकुब ही जिंदा हैं इसलिए वही उत्तराधिकारी हैं।
Published on:
16 Nov 2017 03:38 pm

बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
