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Religious Book गीता में ज़िक्र है Black Magic का, ऐसे होता है काला जादू

अगर आप काला जादू पर विश्वास नहीं करते हैं तो इस खबर को पढ़ने के बाद विश्वास करना पड़ेगा

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Santoshi Das

Nov 22, 2016

Black Magic

Black Magic

लखनऊ.
अगर आप काला जादू पर विश्वास नहीं करते हैं तो इस खबर को पढ़ने के बाद विश्वास करना पड़ेगा। काला जादू के बारे में क्या मिथ है और क्या सच्चाई है आज आपको बताने जा रहे हैं। दुनिया भर में जिस काले जादू के बारे में लोग बाते करते हैं उसका ज़िक्र तो 'हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ श्रीमदभगवदगीता ' में भी मिलता है।


अर्जुन ने जब श्री कृष्ण से सवाल पूछा था की आपका यह कहना है की हर चीज़ एक ही ऊर्जा से बनी है और हर एक चीज़ दैवीय है तो भला दुर्योधन ऐसा काम क्यों करता है? तब भगवान् कृष्ण ने जावेद दिया था 'ईश्वर निर्गुण, दिव्यता निर्गुण है'। उसका अपना कोई गन नहीं है। इसका मतलब है की वह बस विशुद्ध ऊर्जा है। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं। जो बाघ आपो खाने आता है उसमें वही ऊर्जा होती है जो आपको आपको बचाने आता है। बस ऊर्जा अलग अलग तरीके से काम करता है।


लखनऊ के तंत्र और काला जादू में परंपरागत सोमनाथ पुरोहित ने बताया की ब्लैक मैजिक भी एक तरह की ऊर्जा का इस्तेमाल करने की प्रणाली है। जब किसी ऊर्जा का इस्तेमाल तंत्र साधना में किया जाता है तो वह ब्लैक मैजिक होता है।




दरअसल जब काला जादू का नाम आता है तो लोगों के मन में बंगाल के काला जादू का ख्याल कौंधने लगता है। मगर यह गलत है। काला जादू अफ्रीका से आया है। सामान्य लोगों के लिए काला जादू विधा आज भी रहस्य से जुड़ा हुआ है। पुरोहित सोमनाथ ने बतया की ब्लैक मैजिक सीखने के लिए व्यक्ति को विशेष प्रार्थना और पूजा पाठ करनी पड़ती है। सिद्धि मिलने के बाद ही लोगों को इस ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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गुड़िया में जान डाल देता है काला जादू

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सोमनाथ पुरोहित ने बताया की तंत्र विज्ञान के अनुसार, यह एक बहुत ही दुर्लभ प्रक्रिया है जिसे बहुत ही विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया जाता है। इसे करने के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता की जरूरत होती है।कुछ ही लोग इसे करने में सक्षम होते हैं। इस प्रक्रिया में गुड़िया जैसी मूर्ति का इस्तेमाल होगा है। यह गुड़िया कई तरह की खाने की चीजों जैसे बेसन, उड़द के आटे आदि से बनाया जाता है। इसमें विशेष मंत्रों से जान डाली जाती है। उसके बाद जिस व्यक्ति पर जादू करना होता है उसका नाम लेकर पुतले को जागृत किया जाता है।


काला जादू यानि वुड

मान्यता है की 1847 में एरजूली डेंटर नाम की वूडू देवी एक पेड़ पर अवतरित हुई थी। उसे सुंदरता और प्यार की देवी माना जाता था। यहां उसने कई लोगों की बीमारियां और परेशानियां अपने जादू से दूर कर दी। एक कैथोलिक पादरी को यह सब पंसद नहीं आया, उसने इसे ईशनिंदा करार देकर उस पेड़ के तने को काट डालने का आदेश दिया। इसके बाद में स्थानीय लोगों ने यहां देवी की मूर्ति बनाई और पूजा करने लगे।


किया जाता है जानवरों के अंगों का उपयोग

वूडू में मुख्य तौर पर जानवरों के अंगो का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जानवरों के अंगों से समस्या समाधान का दावा किया जाता है। इस जादू से पूर्वजों की आत्मा किसी शरीर में बुलाकर भी अपना काम करवा सकते हैं। इसके अलावा दूर बैठे इंसान के रोग व परेशानी के इलाज के लिए पुतले का भी उपयोग किया जाता है। वूडू जानने वालों का मानना है कि इस धरती पर मौजूद हर जीव शक्ति से परिपूर्ण है। इसलिए उनकी ऊर्जा का उपयोग करके बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। वूडू में जानवरो जैसे की बंदर, मगरमच्छ, बकरी, ऊंट, लंगूर, छिपकली, तेंदुए आदि के अंग उपयोग में लाए जाते हैं।




काला जादू क्या होता है?

जानकारों का मानना है ये जादू और कुछ नहीं बस एक बंच ऑफ एनर्जी है। जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या कहें एक इंसान के द्वारा दूसरे इंसान पर भेजा जाता है। इसे लॉ ऑफ़ कंज़र्वेशन ऑफ़ एनर्जी से समझा जा सकता है। हिंदी में कहा जाए तो ऊर्जा को न ही पैदा किया जा सकता है और न ही इसे खत्म किया जा सकता है।सिर्फ इसके स्वरूप को दूसरे स्वरूप मे बदला जा सकता है। यदि ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल है, तो नकारात्मक इस्तेमाल भी है। सनातन धर्म का अथर्ववेद सिर्फ सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के लिए ऊर्जाओं के इस्तेमाल को ही समर्पित है। आपको यह समझना होगा कि ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न तो दैवीय होती है, न शैतानी। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं – देवता या शैतान। यह बिजली की तरह होती है। क्या बिजली दैवीय या शैतानी, अच्छी या बुरी होती है? जब वह आपके घर को रोशन करती है, तो वह दिव्य होती है।


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