
File Photo of Yogi Adityanath and PM Modi during special discussion on UP Government
उत्तर प्रदेश में बनने वाली नई सरकार के नए समीकरण में डिप्टी सीएम की रेस को लेकर भी तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि डिप्टी सीएम केशव मौर्य के चुनाव हारने के बाद अब समीकरण बदले हुए नज़र आ रहे हैं। वहीं डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की कार्यशैली, सरकार में उनकी उदासीनता और कार्यकर्ताओं से 'नियमतः' वाली उनकी दूरी की वजह से भी इस बार उनका दोबारा डिप्टी सीएम जैसे पद पर पहुँचना काफी मुश्किल दिख रहा है।
पत्रिका आपको बताने जा रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश को अपना गृह मंत्री मिलेगा? क्योंकि पिछले कई दशकों से उत्तर प्रदेश में गृह मंत्रालय हमेशा से मुख्यमंत्री ही रखते आए हैं। जबकि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी गृहमंत्री की कुर्सी मुख्यमंत्री के साथ ही लगती है वहाँ भी भाजपा सरकार ही है। तो क्या इस बार उत्तर प्रदेश को गृह मंत्री मिलेगा?
Home Minister of Uttar Pradesh गृह मंत्री की तलाश कब होगी पूरी
भाजपा के नए जीते विधायकों की ओर से केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी पूरी दमदारी से पेश की जा रही है। हर बार की तरह उत्तर प्रदेश की जनता इस बार भी अपने गृहमंत्री की आस लगाए बैठी हुई है। सबसे बड़ा सवाल भी यही है कि क्या इस बार उत्तर प्रदेश को अपना गृहमंत्री मिलेगा?
हर विभाग का अलग मंत्री फिर गृहमंत्रालय खाली कैसे
उत्तर प्रदेश के तमाम विभागों को अपना मंत्री होगा। कृषि, सिंचाई, ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, पंचायती राज, समेत कई महत्वपूर्ण विभाग इनमें शामिल है। परंतु अब तक उत्तर प्रदेश को पिछले चार सरकारों से भी ज्यादा समय से गृहमंत्री नहीं मिल पाया, जबकि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने या पूर्व में जो भी मुख्यमंत्री रहे उन्होंने यह विभाग अपने पास ही रखा।
यूपी में अब तक सिर्फ 3 गृहमंत्री
उत्तर प्रदेश की राजनीतिक सरकारों पर नज़र डालें तो अभी तक केवल दो बार ही प्रदेश को अपना गृहमंत्री मिला है। साल 1985-86 के दौरान मुख्यमंत्री वीर बहादुर की सरकार में सैदुज्जमा गृहमंत्री रहे। फिर नारायण दत्त तिवारी सरकार की कैबिनेट में गोपीनाथ दीक्षित गृहमंत्री बनें। तीसरी बार बनने वाले कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार जो कि 1988-89 तक रही उसमें सुशीला रोहतगी को गृह मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गई थी। तीनों ही यूपी सरकार में ग्रहमंत्री थे।
मुलायम सिंह के सरकार में शामिल होते ही बंद हो गए गृहमंत्री बनना
साल 1989 वाली मुलायम सिंह के समर्थन वाली सरकार बनते ही गृहमंत्री बनाए जाना बंद हो गया। इसी के साथ सत्ता का केंद्रीकरण शुरू हो गया। कुछ समय के लिए बीच में कल्याण सिंह की भाजपा सरकार ने इस मिथक को तोड़कर गृह विभाग में राज्यमंत्री बनाने का चलन शुरू किया था, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार के दो कार्यकाल में दो गृह राज्य मंत्री बनाए पहले बालेश्वर त्यागी एवं दूसरे रंगनाथ मिश्रा जो 2002 तक गृह राज्य मंत्री रहे।
हालांकि उस दौर में भी गृहमंत्री बड़े और नीतिगत फैसले बिना मुख्यमंत्री की सलाह व निर्देश के नहीं लेते थे। इसके बाद की किसी सरकारों ने चाहे भाजपा-बसपा की गठजोड़ सरकार रही हो या बसपा कि अकेले बनी सरकार, सपा की अखिलेश सरकार व योगी आदित्यनाथ की सरकार रही हो किसी ने भी गृह मंत्री बनाना मुनासिब नहीं समझा। प्रदेश की कमान और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर अक्सर तमाम सरकार घिरती रही हैं। इसी कारणवश कोई भी मुख्यमंत्री नहीं चाहता कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और ताकत दूसरी जगह जाए। जिसके गलत इस्तेमाल पर उसकी सरकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
गृहमंत्री पर होती है कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में गृह राज्य मंत्री के पास प्रदेश की कानून व्यवस्था, पुलिस, पीएसी, सीआईडी, इंटेलिजेंस समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रहती है। इनसे संबंधित अफसरों के तबादले पोस्टिंग आदि की जिम्मेदारी भी गृह मंत्री के पास ही रहती थी। पूर्व में गृह मंत्री के पास हॉटलाइन हुआ करती थी जिससे वह जनपद के किसी भी एसपी व आईजी स्तर के अधिकारियों से सीधे बात कर सकते थे। परंतु अब यह हॉट लाइन की व्यवस्था सिर्फ मुख्यमंत्री के पास ही रहती है।
Updated on:
20 Mar 2022 08:48 pm
Published on:
20 Mar 2022 08:35 pm

बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
