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सभी थानों में महिला पुलिसकर्मी दर्ज करेंगी एफआईआर

उत्तर प्रदेश में पीडि़त महिलाओं के अपराध को पंजीकरण के लिए थानों पर महिला आरक्षी व मुंशी तैनात किए जाने के निर्देश डीजीपी अरविन्द कुमार जैन ने दिए हैं।

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Manish Gite

Jun 17, 2015

UP police

UP police

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में पीडि़त महिलाओं के अपराध को पंजीकरण के लिए थानों पर महिला आरक्षी व मुंशी तैनात किए जाने के निर्देश डीजीपी अरविन्द कुमार जैन ने दिए हैं।


उन्होंने सभी आईजी, डीआईजी और एसएसपी को पत्र भेजकर प्रदेश भर के थानों और जीआरपी के थानों में महिला आरक्षी और मुंशी की तैनाती के निर्देश दिए।जनपदीय एवं जीआरपी के सभी थानों पर महिला अपराधों के पंजीकरण के लिए महिला आरक्षी व मुंशी की नियुक्ति की जाए। दंड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत महिला पुलिस कर्मी द्वारा महिला अपराधों से संबंधित समस्त कार्यवाही सम्पादित की जाएगी।


देहात के दूरस्थ थानों में महिला आरक्षी के सहयोग के लिए एक महिला होमगार्ड को नियुक्त किया जाये। धारा 154 दंप्रसं में नियत प्राविधान के अन्तर्गत जब भी विकलांग महिला का बयान अंकित किया जाये तो उसकी वीडियो रिकार्डिंग कराई जाए तथा इंटरप्रेटर अथवा स्पेशल एजूकेटर, अनुवादक एवं विशेष शिक्षित व्यक्ति को साथ रखा जाए तथा प्रत्येक थाने में इंटरप्रेटर एवं स्पेशल एजूकेटर की सूची का रख-रखाव अवश्य किया जाये। जिससे आवश्यकता पडऩे पर इनकी सेवाएं ली जा सकें। यह भी निर्देशित किया गया है कि थानों पर महिला आरक्षी व मुंशी नियुक्त कर उसकी आख्या 22मई तक मुख्यालय को उपलब्ध करायी जाए।


कानून व्यवस्था का पैमाना असंगत-भाजपा

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार के मुखिया के बयान को असंगत बताया हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस विभाग के आंकडे बता रहे हैं की प्रदेश में रोजना 11 से ज्यादा हत्याऐं हो रही है। यदि सरकार के मुखिया का ठीक कानून व्यवस्था का यही पैमाना हैं तो यह शर्मनाक हैं।


प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था का आलम यह है एक राज्यमंत्री फरार हैं जिसकी गिरफ्तारी आजतक नही हो सकी और दूसरा राज्यमंत्री जिसके ऊपर शाहजहांपुर के एक पत्रकार की हत्या का आरोप है, उसे आजतक सरकार ने बर्खास्त नही किया और जांच पड़ताल के नाम पर मामले को रफादफा करने का प्रयास कर रही है। तथा तीसरे राज्यमंत्री के ऊपर सम्बन्धित जिले के एआरटीओ तथा व्यापार कर विभाग के सयुक्त आयुक्त ने पैसे के लिए धमकाने का आरोप लगाया है। उसके भी खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।


बहराइच में सपा के एक नेता ने आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या कर दी यही सभी घटनाए कानून व्यवस्था की हालात को स्वत: बयान कर रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक तरफ थानों में एफआईआर नहीं लिखी जा रही है तो दूसरी तरफ जाली नोंटो का नेटवर्क बडे पैमाने पर काम कर रहा हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश की कानून व्यवस्था चुस्त दुरूस्त बताना सच्चाई पर पर्दा डालने जैसा है।

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