
लखनऊ। डायबिटीज यानि मधुमेह पूरी दुनिया में एक खतरनाक बीमारी का रूप लेती जा रही है। कभी अमीरों मानी जाने वाली यह बीमारी मध्य वर्ग के लोगों को भी अपने निशाने पर ले रही है। महिलाएं भी इस बीमारी की चपेट में आ रही हैं और गर्भावस्था के दौरान होने वाले बच्चों की मौतों के कारणों में से एक कारण यह भी साबित हो रहा है। वर्ल्ड डायबिटीज फाउंडेशन के अध्यक्ष डाक्टर अनिल कपूर एक कार्यक्रम के सिलसिले में लखनऊ पहुंचे। डायबिटीज से जुड़े मसलों पत्रिका संवाददाता लक्ष्मी नारायण शर्मा ने डाक्टर कपूर से ख़ास बातचीत की। उस बातचीत के प्रमुख अंश -
सवाल - डायबिटीज को संपन्न वर्ग के लोगों की बीमारी माना जाता है। इस तथ्य में कितनी सच्चाई है ?
जवाब - यह एक भ्रान्ति है कि डायबिटीज संपन्न लोगों को हो रहा है। यह बीमारी हर उस व्यक्ति को अपनी चपेट में ले रहा है जो शारीरिक श्रम से दूर हो रहा है। शहरीकरण और सुविधाओं की बढ़ोत्तरी ने लोगों के जीवन में इस बीमारी के कारणों को बढ़ावा दिया है। नागरिकों का शहरीकरण इस बीमारी के बढ़ने का प्रमुख कारण है।
सवाल - शहरीकरण से डायबिटीज का क्या सम्बन्ध है ?
जवाब - दरअसल शहरीकरण से मतलब इस बात से है कि यहां निवास करने वाले व्यक्ति को पेयजल की व्यवस्था अपने घर में उपलब्ध होती है और उसे हासिल करने के लिए उसे चलना-फिरना नहीं पड़ता। किसी भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए परिवहन के साधन ऑटो, बस, रिक्शा उपलब्ध हैं। ऐसे में व्यक्ति शारीरिक श्रम से बच रहा है और वह अपने भीतर डायबिटीज के सम्भावना बढ़ा रहा है। यह जरूरी नहीं है कि इन साधनों का उपयोग कर रहा व्यक्ति बहुत सम्पन्न हो।
सवाल - इस वर्ष डायबिटीज से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में महिलाओं पर मुख्य रूप से चर्चा हो रही है। इसका क्या कारण है ?
जवाब - दरअसल डायबिटीज महिलाओं और पुरुषों को समान रूप से अपनी चपेट में लेता है लेकिन इलाज के मामले में भेदभाव है। अभी भी महिलाओं में होने वाले डायबिटीज को गंभीरता से नहीं लिया जाता जबकि महिलाओं के डायबिटीज से गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ता है और कई बार यह डायबिटीज गर्भस्थ शिशु की मौत का भी कारण बन जाता है। महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज महिला और बच्चे दोनों के लिए बड़ा ख़तरा होती है।
सवाल - क्या सामाजिक और आर्थिक स्तर से भी इस बीमारी के ग्रस्त होने का कोई सम्बन्ध है ?
जवाब - डायबिटीज हर आर्थिक वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है जो शारीरिक श्रम नहीं करते हैं। बेहद धनाढ्य परिवारों में भोजन की अधिकता और मोटापा डायबिटीज का कारण बनता है जबकि मध्य वर्ग के लोगों में मेहनत की कमी और हर रोज भारी भोजन अधिक मात्रा में ग्रहण करना इस बीमारी की चपेट में आने का कारण बनता है। मेहनत, मजदूरी और कृषि कार्यों में लगे लोगों में इस बीमारी से ग्रस्त होने की संभावना न के बराबर रहती है।
Published on:
14 Nov 2017 03:31 pm
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