उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड का पूरा क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से संपन्न है। जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह से पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने जा रही है। इसमें झांसी, बांदा, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में ऐतिहासिक स्मृतियों को संजोए अनेक प्राचीन दुर्ग/किले/गढ़ हैं। जहां मौजूद 31 ऐसी ऐतिहासिक धरोहर हैं जिनका जीर्णोद्धार सरकार करने जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संदर्भ में बोलते हुए कहा कि, हमें नई पीढ़ी को इनके महत्व से परिचय कराना चाहिए। इस संबंध में व्यवस्थित कार्य किये जाने की आवश्यकता है। बुंदेलखंड क्षेत्र में अवस्थित के प्राचीन किलों/दुर्गों का जीर्णोद्धार करके उन्हें पर्यटन के नवीन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। विशाल परिसर वाले कई किले अपनी भव्यता के साथ बेहतरीन होटल के रूप में तैयार हो सकते हैं। हमें इन संभावनाओं को आकार देना होगा। बुंदेलखंड में किलों/दुर्गों/,गढ़ों के जीर्णोद्धार के लिए पीपीपी मॉडल, सीएसआर पर भी बातचीत चल रही है वहीं जरूरत के अनुसार राज्य सरकार द्वारा भी वित्त पोषण किया जाएगा।
कलिंजर का किला 54 हेक्टेयर में बड़ा विकास
कलिंजर का किला 542 हेक्टेयर के विशाल परिक्षेत्र में अवस्थित है। यहां निजी क्षेत्र की सहभागिता से लाइट एन्ड साउंड शो, कैम्पिंग-ट्रेकिंग रॉक क्लाइम्बिंग और फ़साड लाइटिंग का कार्य कराया जाए। किले पर नाइट गकेजिंग तथा नेचर ट्रेल की गतिविधियों को शुरू किया जाना चाहिए।
झाँसी का दुर्ग 12 एकड़ में फैला किला
झांसी दुर्ग में पर्यटकों का आगमन होता है, वहीं समीप में स्थित बरुआ सागर किला तक जाने के लिए सुगम साधन की जरूरत है। 12 एकड़ परिसर वाला टहरौली किला और 4 एकड़ परिसर वाली दिगारा की गढ़ी, चिरगांव का किला, लोहागढ़ का किला, चम्पत राय का महल, रघुनाथ राव का महल की स्थिति जीर्ण-शीर्ण हो रही है।
रघुनाथ राव महल बनेगा होटल और वॉटर स्पोर्ट्स
बरूआ सागर किले, टहरौली के किले, दिगारा की गढ़ी, चम्पत राय के किले, महल महिपाल निवास, सरीला और रघुनाथ राव के महल को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित कर फ़साड लाइटिंग की जाए। बरुआ सागर के समीप स्थित और तालबेहट किले के नीचे स्थित झीलों पर वॉटर स्पोर्ट्स /एडवेंचर टूरिज्म की गतिविधियों को शुरू किया जाए।
महावीर स्वामी अभ्यारण्य तथा बानपूर्वक किले को इको-टूरिज्म
मड़ावरा के किले और सौराई के किले पर पर्यटन की दृष्टि से पहुंच मार्ग, साइनेज तथा पेयजल व्यवस्था को बेहतर करें। देवगढ़ (दुर्ग) परकोटे के नीचे बेतवा नदी में वॉटर स्पोर्ट की संभावनाएं हैं, इसी प्रकार महावीर स्वामी अभ्यारण्य तथा बानपूर्वक किले को इको-टूरिज्म को विकसित किया जाए।