
Yogi
लखनऊ. प्रदेश सरकार में बागी तेवर अपना रहे मंत्री ओमप्रकास राजभर इस वक्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बुलावे पर उनसे मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। हालांकि उनकी मुलाकार दोपहर 2 बजे निश्चित थी, लेकन 3.30 पर भी उनकी मुलाकात अमित शाह से नहीं हो पाई। फिलहाल वो उनके बुलावे का इंतजार करते दिखे। और इस दौरान उन्होंने कहा कि अमित शाह से मुलाकात बेहम अहम है। मुलाकात से बात नहीं बनी को रास्ते अलग हो जाएंगे। समझौता लंबे समय तक चले ये जरूरी नहीं। भाजपा ने गठबंधन का राज्यधर्म नहीं निभाया है। भाजपा संगठन में मेरी सुनवाई नहीं हुई। अमित शाह को मैं अपना दुखड़ा सुनाऊंगा, अगर बात नहीं बनी, तो अपने लोगों के साथ बैठक करूंगा। फिर कोई फैसला लूंगा।
यूपी सरकार में लगातार उनकी फजीहत हो रही है और इससे वे बेहद आहत हैं। और इसका सबसे बड़ा असर सोमवार को योगी सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने के कार्यक्रम में देखने को मिला जहां उन्होंने शिरकत नहीं की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडे समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें फोन कर बुलाया पर वे कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इसी के चलते उन्हें आज अमित शाह ने दिल्ली बुलाया।
"दे दूंगा इस्तीफा"-
बीेते दिनों लोकसभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद राजभर योगी सरकार पर हमलावर होते दिखे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में बसपा और सपा से भी अधिक भ्रष्टाचार बढ़ गया है। यूपी के 75 जिलों में हम व्यापक आंदोलन करेंगे। कुछ विभागों के अफसर बिना पैसे लिए काम नहीं करते हैं। उन्होंने पार्टी छड़ने की बात कहते हुए कहा कि 10 महीने से मैं इस सरकार में घुट-घुट कर जी रहा हूं। सरकार बार-बार दबा रही है, लेकिन अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। मैं सत्ता का लोभी नहीं हूं। और अगर जरूरत पड़ेगी तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। कासगंज घटना पर उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रदेश सरकार के ही कुछ अधिकारी जिम्मेदार हैं।
"हम यहां केवल हाजिरी देने के लिए हैं क्या"-
आपको बता दें कि भाजपा ने 2017 चुनावों में सुहलदेब भारतीय समाज पार्टी ने भाजपा संग गठबंधन किया था। भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद ओमप्रकाश राजभर को मंत्री पद का दर्जा दिया गया था। इस गठबंधन की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन धर्म के तहत राज्यसभा में मत देने की बाबत हमसे भाजपा ने सम्पर्क ही किया है। भाजपा ने न उम्मीदवार तय करते वक्त हमसे पूछा और न ही नामांकन के लिए बुलाया। ये लोग कहते कुछ और हैं और करते कुछ और ही हैं। संगठन से लेकर सरकार तक के किसी कार्यक्रम में हमें पूछा ही नहीं जाता, न ही हमसे राय ली जाती है। गठबंधन में हम क्या केवल हाजिरी देने के लिए हैं। हम आंख मूंद कर हर फैसले के साथ नहीं खड़े हो सकते।
Updated on:
20 Mar 2018 04:19 pm
Published on:
20 Mar 2018 04:09 pm
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