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Labour Day दिहाड़ी मजदूर किस्मत से लाचार है, काम करे कहां बंद सारा बाजार है

-कोरोनावायरस क कारण दाने-दाने को मोहताब पंजाब के श्रमिक - सरहदें बंद, कारखाने बंद, बेरोजगार मजदूर जाएं तो कहां -मध्य प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, राजस्थान और यूपी से आते हैं मजदूर

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Migrant labourers

Migrant labourers

लुधियाना/चंडीगढ़। कोरोना वायरस ने देश के करोड़ों मजदूरों को मजदूरी से वंचित कर दिया है। अब तो हालात यह है कि मजदूर न घर का है न घाट का। करोना वायरस महामारी के इस माहौल में अगर किसी को मार पड़ी है तो वह है मजदूरों पर। मजदूर वर्ग बेहाल है। बेसुध है। बेरोजगार है। यही हाल पंजाब के मजदूरों का है। किसी ने ठीक ही कहा है- दिहाड़ी मजदूर किस्मत से लाचार है, काम करे कहां बंद सारा बाजार है।

प्रवासी मजदूर

पंजाब में लाखों की संख्या में मजदूर काम करता है। रोजी-रोटी के लिए पंजाब में मजदूरी करने कई राज्यों से मजदूर आते हैं। इनमें ज्यादातर मध्य प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के होते हैं। ये मजदूर यहां पर औद्योगिक इकाइयों, ईट भट्ठा और अन्य कई जगह पर हर तरह का काम करते हैं। यहां तक कि खेतों में भी बाहर से आए मजदूर ही काम करते हैं। अब यह मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। करोना वायरस ने सीधे तौर पर उनकी रोजी-रोटी पर लात मारी है। माहौल अब यह है कि लाखों प्रवासी मजदूर पंजाब से पलायन कर चुके हैं। जो बचे हैं उनके पास न दाना है न पानी है। इन प्रवासी मजदूरों के रहने तथा खाने-पीने की समस्या गहराती जा रही है। अब पलायन भी रुक गया, क्योंकि सीमाएं सील हो चुकी हैं। जो जहां है वहीं रहेगा। इसके चलते कोई इधर से उधर नहीं जा पा रहा है।

भूख क्या-क्या न करा रही

हालांकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य की सभी औद्योगिक इकाइयों, ईट भट्ठों को उत्पादन शुरू करने की अनुमति दे दी है। पंजाब सरकार के कड़े नियमों के चलते यह औद्योगिक इकाइयां शुरू नहीं हो पा रही हैं। राधा स्वामी सत्संग ब्यास ने पहले ही अपने भवन एकांतवास के लिए खोल दिए हैं, सैकड़ों मजदूर रुके हुए हैं। फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। मजदूरों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। कई घटनाएं इस दौर में सामने आई हैं। जैसे गुरुवार को अमृतसर के राम तलाई में घर जाने को लेकर एक मजदूर बिजली टॉवर पर चढ़ गया। जालंधर में एक मजदूर घर जाने को लेकर बीच सड़क पर लेट गया। पूरे पंजाब से ऐसे ही कई किस्से सुनने में आ रहे हैं

घरों से नहीं निकल पा रहे

पंजाब में रहने वाले मजदूरों की स्थिति थोड़ी अलग है। पंजाब के मजदूर ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। उन्हें कारखानों तक पहुंचने में ही दिक्कत हो रही है। पंजाब सरकार के आदेशानुसार वह घरों से ही नहीं निकल पा रहे हैं तो काम पर कैसे जाएंगे। पंजाब का एक बड़ा वर्ग जिसमें ऑटोरिक्शा चालक आते हैं, वह घर पर बैठे हैं। दूसरा पंजाब का वर्ग विभिन्न कार्यालयों में काम करने वाला है। पंजाब सरकार ने इन लोगों की आज तक सुध नहीं ली। इसलिए ये सब मजदूर दिवस पर आज पंजाब सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर रहे हैं।

झारखंड के जगतार

जालंधर के जगतार सिंह प्रवासी मजदूर हैं। झारखंड के रहने वाले हैं। वह कहते हैं कि पिछले 5 साल से वह जालंधर में चमड़ा फैक्ट्री में कार्य काम कर रहे थे। लॉकडाउन के चलते मालिक ने फैक्ट्री बंद कर दी। हमें घर जाने के लिए बोल दिया। अब तक जो पैसा था. उससे हम लोगों ने समय बिता लिया। मेरे परिवार में 10 लोग खाने वाले हैं और मैं अकेला कमाने वाला। सभी लोगों के भूखे मरने की नौबत आ चुकी है। ना घर जा सकते हैं ना यहां काम है। करें तो क्या करें कहां जाएं।

यूपी के मनोज कुमार

पंजाब के मंडी गोविंदगढ़ में लोहे की फैक्ट्रियां हैं। काम यहां सभी इकाइयां बंद पड़ी है। यहां पर यूपी से आए मनोज कुमार ने कहा कि मैं पिछले 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। अब जिस फैक्ट्री में एक साल से काम कर रहा था, वह कोरोनावायरस के चलते बंद हो गई है। मालिक ने घर जाने को बोल दिया। न जाने कब खुलेगी। घर जा नहीं सकते क्योंकि सारे रास्ते बंद हैं। खाने को अन्न का दाना नहीं है। पंजाब सरकार कह रही है कि मजदूरों का ख्याल कर रहे हैं, पर हमारे पास तो आज तक कोई भी पूछने को नहीं आया।

अमृतसर के सुरेन्द्र पाल

अमृतसर के ऑटो चालक सुरेंद्र पाल ने कहा कि अमृतसर में डेढ़ लाख ऑटो चालक है और सभी घर बैठे हैं। जितना जोड़ा था सब खा पी लिया। सरकार ऑटो चलने नहीं दे रही। मजदूरी मिल नहीं रही। क्या करें, कहां जाएं, किससे कहें। डीसी ऑफिस में फोन करके कहते हैं कि घर पर राशन नहीं है तो वह सीधे आकर रसोई की जांच करते हैं। इससे तो अच्छा है सरकार को फोन नहीं करें। इज्जतदार लोग हैं। सरकार राशन देने के नाम पर हमारी बेइज्जती कर रही है।

मजदूरों पर ये पंक्तियां सटीक हैं-

चाहतों और ख्वाहिशों से बहुत दूर हूं मैं

जरूरतों के बोझ तले दबा मजदूर हूं मैं।