
यह घटना किसी डरावनी फिल्मी कहानी जैसी है, सुहागरात के दिन सांप ने डस लिया
मधुबनी(बिहार): (Bihar News ) यह किसी डरावनी फिल्मी कहानी (This is lie a filmy sotry ) जैसा है, जैसे फिल्मों में एक नागिन बदला (Revenge of Serpent ) लेने के लिए आती है और ठीक सुहागरात वाले दिन (Snake bite on golden night ) पूर्व जन्म के पति डस लेती है, ठीक ऐसी घटना हुई बिहार (4500 deaths of snake bite in Bihar ) के मधुबनी जिले में। जिले के हरलाखी थाना क्षेत्र के गांव में एक युवक की सुहागरात के दिन सांप के डसने से मौत हो गई।
खुशिया बदली गम में
हरलाखी थाना क्षेत्र के सुखवासी गांव निवासी नीतीश कुमार का विवाह बासोपट्टी थाना क्षेत्र स्थित मढिया गांव निवासी जोगिन्दर राय की पुत्री से हुई थी। शादी की रात दोनों पक्षों में खुशी का माहौल था। शादी के अगले दिन यानी गुरुवार को पिता ने नम आंखों से अपनी पुत्री को दामाद के साथ विदा किया। दुल्हन के ससुराल आने के बाद महिलाओं ने मंगल गीत गाकर सारी रस्में पूरी की। इसके बाद दूल्हा - दुल्हन को सुहागरात के लिए कोहबर में भेजा गया। लेकिन इस नव दंपति की खुशियां कुछ ही घंटों में गम में तब्दील हो गईं।
अंधविश्वास हावी
सुहागरात पर दूल्हा-दुल्हन अपने कमरे में सो रहे थे। उसी दौरान कहीं से एक सांप निकला और दूल्हे को डस लिया जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने मरीज को किसी अस्पताल या डॉक्टर के पास न ले जाकर झाड़-फूंक के लिए किसी तांत्रिक के पास चले गए। जब तंत्र-मंत्र से कोई सुधार होता नहीं दिखा उसके बाद मरीज को बासोपट्टी पीएचसी ले जाया गया, लेकिन गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे मधुबनी रेफर कर दिया। आखिरकार मधुबनी में डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया।
फिर गए तांत्रिक के पास
गांव लौटने के बाद कुछ ग्रामीणों के कहने पर शव को फिर से तांत्रिक के पास ले जाया गया, और दिन भर तांत्रिक के द्वारा झाड़-फूंक की प्रक्रिया चलती रही। घंटों तक शव को तांत्रिक क्रिया के लिए रखा गया। इसके बावजूद जब कुछ असर होता दिखाई नहीं दिया तो परिजनों ने उसका दाह संस्कार कर दिया।
बिहार में होती हैं 4500 मौतें
गौरतलब है कि देश में सर्पदंश से होने वाली मौतों में बिहार का तीसरा स्थान है। मैदानी और खेती का इलाका होने के कारण यहां सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा होती हैं। बिहार में हर साल सर्पदंश से करीब 4500 लोगों की जान जाती है। इनमें ज्यादातर श्रमिक-किसान वर्ग के गरीब तबके के लोग होते हैं।
Published on:
25 Jun 2020 07:05 pm
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