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विश्व युद्ध का संकेत है ‘डॉल्फिन टंगस्टन खदान’, 2026 में फिर खोली गई ये माइन, अब क्या होने वाला है?

मौजूदा साल 2026 में ऑस्ट्रेलिया की डॉल्फिन टंगस्टन खदान (Dolphin Tungsten Mine) फिर खोल दी गई है। डॉल्फिन टंगस्टन खदान के खुलने पर इसे विश्व युद्ध (World War Sign) का संकेत माना जा रहा है। आइए जानते हैं क्या है डॉल्फिन टंगस्टन खदान का इतिहास और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें…
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भारत

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Vinay Shakya

Jul 18, 2026

Australia Dolphin tungsten mine resume

डॉल्फिन टंगस्टन खदान को फिर से शुरू किया गया (फोटो सोर्स- ब्लूमबर्ग)

Dolphin Tungsten Mine Resume: ऑस्ट्रेलिया की डॉल्फिन टंगस्टन खदान (Dolphin Tungsten Mine) का लगभग 3 दशक बाद फिर से खोली गई है। साल 2026 में डॉल्फिन टंगस्टन खदान का खुलना एक बड़े संकेत की ओर इशारा करती है। इतिहास में दर्ज घटनाएं इस खदान की भूमिका और अहमियत बताती हैं। ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी तट से दूर, तस्मानिया के किंग आइलैंड पर स्थित डॉल्फिन टंगस्टन खदान वैश्विक संघर्षों का सटीक संकेतक रही है। इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो यह खदान हर बार विश्व युद्ध से पहले खोली गई थी।

विश्व युद्ध से पहले खोली गई डॉल्फिन टंगस्टन खदान

साल 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गोला-बारूद उत्पादन के लिए खोली गई यह खदान शांति आने पर 1920 में बंद हो गई। 1938 में द्वितीय विश्व युद्ध की पूर्व संध्या पर इसे फिर सक्रिय किया गया। कोरिया और वियतनाम युद्ध के दौरान यह खदान दो बार खोली गई और साल 1990 में, बर्लिन दीवार गिरने के एक साल बाद इसे हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। खदान बंद होने की वजह से इसकी भूमिगत सुरंगों में भर गया और यह वीरान हो गई।

2026 में फिर खोली गई खदान

ऑस्ट्रेलिया में प्लैटिपस की धाराओं और पेंगुइन कॉलोनियों के बीच 80 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली डॉल्फिन टंगस्टन खदान 2026 में फिर से खोली गई है। यह परियोजना तस्मानिया प्रांत के किंग आइलैंड पर ग्रासी शहर में चल रही है। इस परियोजना की मालिक और संचालक कंपनी किंग आइलैंड शीलाइट है। परियोजना की अनुमानित कुल लागत 64.8 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 50.6 मिलियन पाउंड) है।

इसमें ऐतिहासिक डॉल्फिन खदान के पुनर्विकास का कार्य शामिल है, जिसने 1917 से 1992 तक ओपन-कट और भूमिगत दोनों विधियों से कुल 9.7 मिलियन टन अयस्क का उत्पादन किया था। यह खदान किंग आइलैंड (कुल आबादी लगभग 1,600) का सबसे बड़ा नियोक्ता रही है। इस द्वीप पर अन्य आर्थिक गतिविधियां मुख्य रूप से पशुपालन, पर्यटन, मछली पकड़ना और समुद्री शैवाल खेती तक सीमित हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है खदान?

डॉल्फिन टंगस्टन खदान काफी महत्वपूर्ण है। इस खदान में दुनिया के सबसे बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले टंगस्टन का भंडार है। टंगस्टन बेहद कठोर धातु है, जिसका उपयोग बुलेट, गोले, टैंक, कवच और उच्च तापमान प्रतिरोधी उपकरणों में किया जाता है। कोविड-19 के बाद आपूर्ति श्रृंखलाओं में आई गड़बड़ी और दुर्लभ खनिजों की होड़ की वजह से डॉल्फिन टंगस्टन खदान की अहमियत बढ़ गई। वाशिंगटन, ब्रुसेल्स, बीजिंग और मॉस्को में टंगस्टन अब राष्ट्रों के भाग्य तय करने वाला रणनीतिक तत्व माना जा रहा है।

टंगस्टन की कीमत में जबरदस्त उछाल

साल 2025 की शुरुआत से टंगस्टन की कीमतें लगभग 8 गुना बढ़ चुकी हैं। इस उछाल ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक का परिवार कजाकिस्तान में एक टंगस्टन परियोजना से जुड़ा है। अमेरिकी सरकार इस परियोजना को संघीय ऋण देकर समर्थन देने पर विचार कर रही है। डोनाल्ड ट्रंप और लटनिक दोनों ही इस मामले में व्यक्तिगत रूप से शामिल रहे, जिससे वित्तीय स्व-व्यवहार के सवाल उठे हैं।

व्हाइट हाउस ने इन लेन-देनों को उचित बताया है। खदान की मूल कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष और CEO केविन पलास (Kevin Palas) फिर से इस माइन को पूरी तरह से खोलने की तैयारी की है। केविन पलास अनुभवी खनिज निवेशकों के साथ जलमग्न भूमिगत सुरंगों को फिर से चालू करने का कठिन अभियान चला रहे हैं।

पलास के मुताबिक, जनवरी 2025 से फोन लगातार बजने शुरू हो गए। ज्यादातर कॉल्स में लोग कहते हैं- हमें लगा था कि आपका कारोबार बंद हो गया है। 12 महीने पहले तक कंपनी नकदी की रोजाना जद्दोजहद में लगी थी, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। दिसंबर से खदान की कमाई शुरू फिर से शुरू हो गई है।

मौजूदा समय में डॉल्फिन खदान से हर महीने 6-7 शिपिंग कंटेनरों में धूसर टंगस्टन सांद्रण निर्यात किया जा रहा है। प्रत्येक कंटेनर की कीमत मौजूदा भाव पर लगभग 20 लाख डॉलर है। डॉल्फिन खदान चीन के बाहर उच्च गुणवत्ता वाला और विशाल टंगस्टन भंडार है।

डॉल्फिन खदान के लिए चुनौतियां

डॉल्फिन खदान को फिर के शुरू कर दिया गया है। हालांकि, खदान में फिर से खनन को चालू रखने के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। पिछले दशक में अलमोंटी, ईक्यू और ग्रुप-6 जैसी कंपनियों ने टंगस्टन खनन में 35 करोड़ डॉलर से अधिक का नुकसान उठाया है। पश्चिमी देशों में टंगस्टन खनन लाभकारी साबित होना मुश्किल रहा है, क्योंकि निवेशक चीन के बाजार में बाढ़ लाने के डर से सतर्क रहते हैं।

डॉल्फिन खदान के मूल कंपनी पर लगभग 16 मिलियन डॉलर का कर्ज है, जिसे 12 महीनों के अंदर चुकाना होगा। यह भुगतान आंशिक रूप से पानी भरी भूमिगत सुरंगों से अयस्क निकालने की गति पर निर्भर करता है। यदि सब ठीक रहा तो कंपनी 2030 के दशक तक प्रति वर्ष 2,000 मीट्रिक टन टंगस्टन धातु की आपूर्ति करने की उम्मीद रखते हैं।

यह विश्व स्तर पर सालाना खनन किए जाने वाले लगभग 85,000 टन टंगस्टन का करीब 2.4% होगा। डॉल्फिन खदान के मूल कंपनी ग्रुप-6 के कार्यकारी अध्यक्ष और CEO केविन पलास कहते हैं कि निवेशकों के इरादे क्या हैं? क्या वे सिर्फ महत्वपूर्ण खनिजों के बढ़ते महत्व का फायदा उठाना चाहते हैं? हमें दीर्घकालिक और स्थिर निवेश की जरूरत है, न कि अल्पकालिक सट्टेबाजी की।

टंगस्टन का सीमित मार्केट बड़ी चुनौती

टंगस्टन का बाजार अन्य धातुओं की तुलना में बहुत छोटा है। दुनिया में हर साल 23 मिलियन टन तांबा और 2.6 बिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन होता है, जबकि टंगस्टन का उत्पादन सीमित रहता है। वैश्विक परिदृश्य में डॉल्फिन जैसी परियोजनाएं, अब सिर्फ व्यावसायिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व रखती हैं।

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को अपने उत्पादकों को उसी तरह समर्थन देना होगा जैसा युद्धकाल में दिया जाता था। ऑस्ट्रेलिया जैसे संसाधन संपन्न देशों की भूमिका यहां निर्णायक हो सकती है। यदि सरकारें सही नीतियां बनाती हैं, तो टंगस्टन जैसा खनिज, जिसे कभी युद्ध का सूचक माना जाता था, अब शांति बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डॉल्फिन खदान इस संक्रमण काल की सबसे प्रतीकात्मक कहानी बनकर उभरी है।