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एक गलत इंजेक्शन लगाने के बाद सही करने लगाया दूसरा, जिसके बाद ये मासूम नहीं रहा चलने लायक

एक गांव में झोलाछाप डॉक्टर ने एक मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ कर दिया।

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एक गलत इंजेक्शन लगाने के बाद सही करने लगाया दूसरा, जिसके बाद ये मासूम नहीं रहा चलने लायक

सरायपाली. छत्तीसगढ़ के एक गांव में झोलाछाप डॉक्टर ने एक मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ कर दिया। डॉक्टर ने 3 साल के बच्चे को एक इंजेक्शन लगाया। जिसके बाद उसके पैरों ने काम करना बंद कर दिया। संतलाल पटेल ने झोलाछाप नंदकुमार पटेल के विरुद्ध कलक्टर महासमुंद, अनुविभागीय अधिकारी सरायपाली व खंड चिकित्सा अधिकारी बसना से लिखित में शिकायत करते हुए तथाकथित चिकित्सक पर कार्रवाई करते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की है।

बुखार से पीडि़त 3 वर्षीय तन्मय को ऐसा इंजेक्शन लगा दिया गया कि पहले बायां पैर कमजोर हो गया फिर दायां पैर। संतराम अपने पोते के इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खाते फिर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम दुर्गापाली विकासखंड बसना निवासी संतराम पिता जगतराम पटेल का पोता तन्मय पटेल (3) को बुखार आने पर गांव में घूम-घूमकर इलाज करने वाले झोलाछाप नंदकुमार पिता धनसिंह पटेल ग्राम दुर्गापाली, थाना सरायपाली द्वारा 18-4-2017 को इलाज किया गया। तन्मय के बाएं कमर में इंजेक्शन लगाया कुछ देर बाद ही बायां पैर कमजोर हो गया जिससे बालक लंगड़ाने लगा।

दूसरी बार जब इसकी जानकारी उस तथाकथित चिकित्सक को दी तो उसने दाईं कमर पर एक और इंजेक्शन लगाया बाद इसके दाएं पैर भी कमजोर होनेे लगा। उसके बाद वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया। जब नंदकुमार पटेल को इसकी जानकारी दी गई तो पहले तो इलाज का सारा खर्च देने की बात कही, बाद में उसे भी मुकर गया और धमकी देने लगा। संतराम पटेल 6 माह से अपने पोते के इलाज के लिए अस्पताल दर अस्पताल भटक रहा है। इलाज में ही संतराम का बहुत सारा पैसा खर्चा हो चुका है संतराम पटेल ने तथाकथित चिकित्सक के रवैए से क्षुब्ध होकर इसकी शिकायत कलक्टर महासमुंद, एसडीएम सरायपाली एवं खंड चिकित्सा अधिकारी बसना से की है, मगर अभी तक उनकी शिकायत के एक महीना गुजर गया फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।


क्षेत्र में बड़ी संख्या में झोलाछाप चिकित्सक

क्षेत्र में बड़ी संख्या में झोलाछाप चिकित्सक कार्यरत हैं। जो गांव में घूम घूम कर लोगों का इलाज कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सागरपाली में ही कई लोग फर्जी डिग्री लेकर बकायदा क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है।

कभी-कभी इन फर्जी रूप से संचालित क्लीनिकों पर छापेमारी की कार्रवाई तो होती है पर चिकित्सक पर बड़ी कार्रवाई नहीं होने से हुए अपने पुराने धंधे पर फिर से लौट आते हैं। कई फर्जी चिकित्सक लोगों के स्वास्थ्य को ताक पर रखकर इलाज किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग इन झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। अनेक दफे विभाग को शिकायत भी की जा चुकी है।