
महासमुंद. खरीदी केन्द्रों में धान बेचने के बाद भुगतान के लिए किसानों को भटकना पड़ रहा है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की महासमुंद ब्रांच से संबद्ध आठ सोसाइटियों के करीब 700 किसान ऐसे हैं, जिनका खाता अन्य बैंकों में हैं, इनमें से अधिकांश किसानों को धान बेचने के पखवाड़े और महीनेभर बाद भी धान का भुगतान नहीं मिल पाया है। भुगतान के लिए किसान अपनी सोसाइटी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा महासमुंद और अपने खाते वाले बैंक का चक्कर लगा रहे हैं।
भुगतान नहीं मिलने की शिकायत लेकर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा महासमुंद में बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी दर्जनों किसान धान विक्रय की पर्ची और अपना बैंक खाते लेकर यह पता करने पहुंचे थे कि धान बेचने के इतने दिनों बाद भी उनके खाते में पैसा क्यों नहीं आया है। किसानों ने पत्रिका को बताया कि धान बेचने के बाद अपने बैंक खाते में पैसा आने का इंतजार कर रहे हैं। बैंक जाकर पता करते हैं तो कहा जाता है कि आपके खाते में पैसा नहीं आया है। सोसाइटी जाकर पता करते हैं तो कहा जाता है कि हमने तो अपना काम कर दिया है। नाम, गांव, खाता नंबर, सहित धान क्रय की पूरी जानकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक महासमुंद ब्रांच को भेज दी है। आप वहीं जाकर पता करें। इधर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक महासमुंद ब्रांच आने पर शाखा प्रबंधक द्वारा कहा जाता है कि खाता नंबर, आईएफसी कोड या बैंक के नाम आदि दर्ज करने में त्रुटि हुई होगी, ऑपरेटर के पास जाकर सुधार करा लें। इस पर किसान ऑपरेटर के पास जाते हैं, लेकिन किसानों के प्रति ऑपरेटर का व्यवहार बहुत रुखा होता है। किसानों को सही जानकारी नहीं दी जाती और काम करने में टाल-मटोल किया जाता है। गांव-गांव से आए किसान घंटों खड़े रहते हैं।
पैसा नहीं मिलने से परेशान तो हैं ही, पैसा क्यों नहीं मिल रहा और कब तक मिलेगा, इसका जवाब नहीं मिलने से और भी परेशान हो जाते हैं। ऑपरेटर के सामने दयनीय मुद्रा में खड़े चार-पांच किसानों से पत्रिका टीम ने बातचीत कर उनका पीड़ा जानने की कोशिश की तो ऑपरेटर भड़क गया और अपनी कुर्सी से उठकर चला गया। किसानों का कहना था कि इसका तो यही रवैया है। ज्ञात हो कि भुगतान के लिए भटक रहे ज्यादातर किसान छोटे और मझोले किसान हैं, सालभर की मेहनत की कमाई हाथ आने में एक-एक दिन का इंतजार उन्हें बहुत भारी पड़ रहा है। वे रोज चक्कर काट रहे हैं।
साफ्टवेयर में अपडेट नहीं है खाते नंबर
पत्रिका पड़ताल में पता चला है कि धान खरीदी के पूर्व किसानों ने पंजीयन कराते समय बैंक पासबुक की छायाप्रति सहित बैंकिंग संव्यवहार की पूरी जानकारी दस्तावेज में दी थी। लेकिन साफ्टवेयर में कई किसानों की जानकारी गलत दर्ज की गई है। इसके चलते भी किसानों के खाते में राशि नहीं पहुंच पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हम किसानों को जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखाओं में खाते खोलने की अपील कर रहे हैं, ताकि ऐसी समस्याएं न हो।
एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक महासमुंद ब्रांच के अंतर्गत झालखम्हरिया, नायकबांधा, कनेकेरा, पिटियाझर, खट्टी, बेलसोंडा, बरोंडाबाजार और खम्हरिया आठ सोसाइटियां हैं। इन सभी सोसाइटी क्षेत्र के किसान इस दिक्कत से जूझ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोसाइटी वाले सहकारी बैंक और अन्य बैंकों के खातेधारी सभी किसानों का एक लिस्ट बनाकर भेज देते हैं। इस कारण दिक्कत होती है। वहीं सोसाइटी वाले प्रमाण दिखाते हैं कि हमने अलग-अलग जानकारी भेजी है।
बैंक पहुंचे किसानों ने बताई अपनी पीड़ा
ग्राम लाफिनखुर्द के किसान पुरानिक साहू व दानवीर ने बताया कि उन्होंने बरोंडाबाजार समिति में ७-८ दिसंबर को धान बेचा है, लेकिन भुगतान अभी तक नहीं मिला है। लभराकला के शोभाराम निषाद ने बताया कि उन्होंने खट्टी सोसाइटी में धान बेचा है, उनका खाता जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक महासमुंद में है, फिर भी भुगतान अटका हुआ है। ऑपरेटर द्वारा ग्रामीण बैंक में पता करो कहा जा रहा है। इसी प्रकार लभराखुर्द के हेमलाल चंद्राकर ने बताया कि उनका खाता स्टेट बैंक में है, १३ तारीख को धान बेचा है। साराडीह के समारू बंजारे ने बताया उन्होंने बेलसोंडा सोसाइटी में ८ तारीख को धान बेचा है, उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक का खाता नंबर दिया है, लेकिन भुगतान अब तक नहीं मिला है।
खाते की फोटोकॉपी लेकर आरटीजीएस कर रहे
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक महासमुंद से धान के भुगतान की राशि एक्सिस बैंक को भेजी जाती है। एक्सिस बैंक से आरटीजीएस कर अन्य बैंकों में किसानों के खाते राशि भेजी जाती है। आईएफसी कोड या खाता नंबर गलत होने के कारण ऐसी दिक्कत आ रही हैं। ऐसे किसानों के खाते की फोटोकॉपी लेकर आरटीजीएस कर रहे हैं।
एनएस ठाकुर, शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक महासमुंद
Published on:
28 Dec 2017 04:58 pm
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