
मकान के सपने होंगे साकार, छोटे भूखंडों की खरीदी-बिक्री पर रोक हटने के बाद शुरू हुई रजिस्ट्री
महासमुंद. पांच डिसमिल से कम जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक हटने के बाद अब जिला पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री शुरू हो गई है। चार साल बाद आए इस फैसले से छोटे भूखंड स्वामियों को बड़ी राहत मिली है।
गौरतलब है कांग्रेस ने जनघोषणा पत्र में पांच डिसमिल से कम जमीन की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक को हटाने का वादा किया था। नई सरकार बनते ही 29 दिसंबर को इसकी घोषणा की गई थी।
अब जिला कार्यालयों में इसके आदेश भी आ गए हैं। गौरतलब है कि पूर्व सरकार ने जून 2014 में 5 डिसमिल से कम जमीन की खरीदी व बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके पीछे सरकार ने यह दलील दी थी कि इसकी वजह से सीमांकन, बटांकन नहीं हो पाता था और छोटी जमीन की पहचान नहीं हो पाती थी। इस वजह से छोटे भूस्वामी अपनी संपत्ति बेच नहीं पा रहे थे।
अब शासन के नए निर्देश से राजस्व बढऩे की उम्मीद की जा रही है। जिला पंजीयक कार्यालय में छोटे भूखंड स्वामियों को भी ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। अप्रैल से लेकर अब तक 4500 रजिस्ट्री हुई है। नई सरकार के फैसले के बाद उन लोगों का मकान बनाने का सपना साकार होगा, जो बड़ी जमीन की खरीदी नहीं कर पा रहे थे। ज्ञात हो कि छोटे भूखंडों की खरीदी-बिक्री नहीं होने से लोग परेशान थे। अपनी हैसियत के हिसाब से जमीन नहीं खरीद पा रहे थे।
हाउसिंग बोर्ड के भूखंडों में भी राहत
हाउसिंग बोर्ड के भूखंडों को लीज डीड रजिस्ट्री कराने के लिए भी बी-1 खसरा भुइंया सॉफ्टवेयर में अपडेट नहीं होने के बाद भी रजिस्ट्री हो सकेगी। शासन ने हाउसिंग बोर्ड के भूखंडों को लेने वाले लोगों को भी राहत दी है। इसके लिए संबंधितों को हाउसिंग बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण-पत्र लाना होगा। जिसके जरिए मेनुअल आधार पर भी रजिस्ट्री की जाएगी।
खसरा नंबर के नक्शा में अंकन की अनिवार्यता समाप्त
पटवारी के पास उपलब्ध कैडस्ट्रेल नक्शा और उसके भू-नक्शा सॉफ्टवेयर में सभी खसरा नंबर का बटांकन नहीं होने व इन खसरा नंबरों को भू-नक्शे में अंकन करने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए कुछ निर्देश दिए गए हैं। इनमें पूर्व में छोटे भूखंडों का पंजीयन होने और नक्शे में अंकन किए बिना खसरे में भूमि स्वामी का नाम दर्ज किया गया है।
ऐसे खसरा नंबरों का बिना विस्तृत सर्वेक्षण व गहन जांच के नक्शे में अंकन संभव नहीं होने के तथ्य को देखते हुए यदि कोई भूस्वामी किसी खसरा नंबर के धारित सभी भूमि को अंतरित करना चाहता है, तो पंजीयन के लिए उस खसरा नंबर के नक्शे में अंकन की अनिवार्यता को आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई है। यदि ले-आउट के आधार पर किसी भूमि स्वामी द्वारा किसी भूखंड का विक्रय किया जाता है, तो ले-आउट को पंजीयन का आवश्यक अंग मानते हुए बिना नक्शा बटांकन की पंजीयन की कार्यवाही होगी।
इसके अलावा खसरा व नक्शा में आबादी भूमि के रूप में दर्ज के अंतर्गत निवासरत व्यक्तियों द्वारा भूखंडों का भूमिस्वामीवार कोई भी भू-अभिलेख व नक्शा अभी तक शासन ने तैयार नहीं किया है। इस वजह से आबादी भूमि के रूप में अंकित खसरा नंबर के अंदर यदि किसी व्यक्ति द्वारा अपने विधिपूर्वक कब्जे की भूमि का विक्रय करने पंजीयन के लिए भू अभिलेख व नक्शे की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
जिला पंजीयक दीपक कुमार मंडावी ने बताया कि 5 डिसमिल से कम जमीन की खरीदी व बिक्री पर रोक हट गई है। छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री शुरू हो गई है। पिछले कुछ दिनों से लोग जानकारी लेने के लिए भी आ रहे हैं। शासन का आदेश भी जारी हो गया है।
Published on:
24 Jan 2019 01:52 pm
बड़ी खबरें
View Allमहासमुंद
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
