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सौर सुजला योजना से सिफ दो सौ किसानों को मिला लाभ, इतने किसान अब भी कर रहे इंतजार

बिजली की समस्या से बड़ी राहत देने के लिए सौर सुजला योजना की शुरुआत हुई

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सौर सुजला योजना से सिफ दो सौ किसानों को मिला लाभ, इतने किसान अब भी कर रहे इंतजार

महासमुंद. सौर सुजला योजना के तहत बिजली विहीन खेतों तक सोलर पंप लगाने का प्लान फिसड्डी साबित हो रहा है। छह महीने में सिर्फ 200 किसानों के खेतों में पंप लगाने में क्रेडा सफल हो पाया है।

क्रेडा के अफसरों के मुताबिक बिजली पहुंच विहीन किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सौर सुजला योजना की शुरुआत की गई है। इसके लिए 95 फीसदी अनुदान पर किसानों को सोलर प्लांट के लिए मशीन का वितरण करना होता है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते जरूरतमंद किसानों को समय पर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में 600 किसानों को सौर सुजला योजना का लाभ देने का लक्ष्य मिला है। इसके तहत जिले के 650 किसानों ने के्रडा विभाग में पंप लगाने के लिए आवेदन किया है। करीब 200 पात्र हितग्राहियों के खेतों में सोलर पंप लगाने का कार्य पूर्ण हो चुका है।

शेष किसानों को विभाग की स्वीकृति का इंतजार है। गत वर्ष 2017-18 में 1200 सोलर पंप स्थापित करने का लक्ष्य मिला था। हालांकि, यह लक्ष्य बाद में कम कर 750 कर दिया गया था। ज्ञात हो कि पिछले तीन वर्षों से जिले में सूखे के हालात हैं। किसान सिंचाई और बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं। बिजली की समस्या से बड़ी राहत देने के लिए सौर सुजला योजना की शुरुआत हुई। इससे किसानों में थोड़ी सी उम्मीद जगी। पिछले दो वर्षों से सोलर पंप के लिए किसानों में काफी उत्साह दिखा। कृषि विभाग और के्रडा के समन्वित प्रयास से लक्ष्य से भी ज्यादा सोलर पंप स्थापित कर इस योजना के क्रियान्वयन में जिला प्रदेश में अग्रणी रहा।

फैक्ट फाइल
वर्ष लक्ष्य पंप स्थापित
2016-17 500 958
201718 750 1182
2018-19 500 200

होगा लक्ष्य पूरा
सौर सुजला योजना के तहत में 200 पंप स्थापित किए जा चुके हैं। नवंबर में लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
एमएस गायकवाड़, सहायक अभियंता, क्रेडा, महासमुंद

नवंबर तक टारगेट पूरा करने का प्रयास
क्रेडा अधिकारी ने अनुसार 200 सोलर पंप लग चुके हंै। 400 पंप का फाउंडेशन भी तैयार किया जा चुका है। नवंबर 2018 तक 400 पंप लगाने का कार्य पूर्ण हो जाएगा। ज्ञात हो कि जिले में करीब एक लाख किसान हैं और कुल कृषि रकबे का महज 25-30 प्रतिशत ही सिंचित है। अधिकतर किसानों का कृषि रकबा अब भी मानसून के भरोसे है। बारिश नहीं तो फसल नहीं। ऐसे हालात में जब अधिक से अधिक खेतों में पंप लगाने की जरूरत है, तब जिले को कम लक्ष्य मिल रहा है।