महोबा. महोबा जिले के चरखारी में राजवंश के उत्तरधिकारियों के मध्य संपत्ति के बंटवारे को लेकर हुए खुनी संघर्ष के उपरान्त राजमहल में सुरक्षा के लिए पीएसी सहित पुलिस बल तैनात किया गया है। संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए बड़े युवराज को आवश्यक चिकित्सा मुहैया कराते हुए पुलिस अभिरक्षा में दिया गया है। सीओ दिनेश यादव व एचएसओ रीता सिंह द्वारा दोनों पक्ष के मध्य समझौता कराने का प्रयास किया गया।
पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि चरखारी रियासत के राजवंश के उत्तराधिकारियों जय सिंह और जयराज सिंह के मध्य सम्पत्ति के बटवारे को लेकर काफी समय से विवाद है। राजमाता उर्मिला सिंह द्वारा इस मामले में ठोस निर्णय न लिए जाने के कारण जयराज सिंह ने परिवार के प्रति बागी तेवर अखित्यार कर लिए हैं। रावबाग स्तिथ राजमहल में कल रात दोनों पक्षों के बीच हुई कहा सुनी के उपरांत संघर्ष हुआ है। दोनों ही पक्षों के बीच मारपीट हुई है।
वहीँ दूसरी तरफ जयराज सिंह ने सेवक राजेश को घटना के लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उसने उनकी पत्नी के साथ अभद्रता करने का आरोप लगाया है। राजमाता सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने सेवक का पक्ष लेकर विवाद को तूल दिया।
जयराज के मुताबिक चरखारी में राजवंश की प्राचीन धरोहरों ड्योढ़ी दरवाजा, ओल्ड पैलेस सहित विभिन्न भू सम्पतियों की राजमाता उर्मिला सिंह द्वारा की गई बिक्री का विरोध करने पर समूचा परिवार उसके खिलाफ हो गया और भाजपा के एक स्थानीय बड़े नेता के इशारे पर फर्जी मुकदमें लिखाये जाने की साजिश हो रही है। जयराज सिंह खुद को असुरक्षित बताते हुए कहते हैं कि उन्हें बीजेपी के स्थानीय नेताओं से जान का खतरा है।
सीओ दिनेश सिंह ने बताया कि मामले में राजमाता उर्मिला सिंह ने छोटे पुत्र जयराज सिंह पर सुनियोजित तरीके से परिजनों पर हमला बोलने और आतंक का माहौल बनाने का आरोप लगाया है। तत्कालीन राजा जयंत सिंह के निधन के उपरांत बड़े पुत्र जय सिंह को राजवंश का उत्तरधिकारी घोषित किया गया था। इस पर जयराज ने बगावती रुख अपना लिया था। तभी से राजघराने में दो धड़े दिखाई दें रहे हैं, जो अब खुलकर सामने आ गये हैं। कल रात हुई घटना के उपरांत प्रशासन ने राजमहल में आम जनता की आवाजाही पर रोक लगा दी है। पुलिस मामले की विस्तृत पड़ताल कर रही है।