
महाराजगंज सड़क हादसा
महाराजगंज. जिले में सड़क हादसे में पिछले एक सप्ताह में 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इस घटनाओं की वजह तेज रफ्तार व अप्रशिक्षितों के हाथ में स्टेयरिंग का होना बताया जा रहा है। साथ ही साथ खराब सड़कें ही इन हादसों के लिये काफी हद तक जिम्मेवार है।
दो दिन पहले महराजगंज सदर कोतवाली क्षे़त्र के सिसवा महुआ में ऑटो और ट्रक की भिड़ंत में चार लोग असमय काल के गाल में समा गए। ये सभी लोग अपने एक रिश्तेदार को अस्पताल को देखकर ऑटो से लौट रहे थे। ट्रक को ओवरटेक करने के चक्कर में दोनों की भिड़ंत हो गई। हादसे में ट्रक का तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन ऑटो में बैठे 15 में से चार की जान चली गई।
कुछ दिन पहले ही कुल्हई थाना क्षेत्र में बन रहे ओवर ब्रिज से इंडिगो कार के टकराने से दो लोगों के परखचे उड़ गए थे इसमें सड़क बना रही कंपनी पीएनसी का एक कर्मचारी भी था। खूनी स्थल से खून के धब्बे अभी मिटे भी नहीं थे कि शनिवार देर रात पिकअप की खड़े ट्रक से हुई टक्कर में पांच लोग काल के गाल में समा गए।
इसके पहले जिले के विभिन्न इलाकों में हुई सड़क हादसे में करीब सात अन्य लोगों की भी जानें गई। कहीं कहीं तो सड़क विभाग की गलती भी दुर्घटना की वजह बन रहा है। जैसे सिद्धार्थनगर- गोरखपुर और सोनौली-गोरखपुर रूट पर बन रहा हाइवे अभी कंपलीट नहीं है बावजूद इसके कई जगह सड़क कंपलीट मानकर रूट डायवर्जन का सिग्नल बना दिया गया है। इस सिग्नल का पालन करने से भी दुर्घटनाएं हो रही है। दो दिन पूर्व कुल्हुई थाना अंतर्गत हाइवे के ओवरब्रिज पर हुई दुर्घटना की वजह यही रही है।
ओवर ब्रिज के निर्माणाधीन होने के बावजूद निर्माण कंपनी ने दोनों साइड में पुल पर चढ़ने का सिग्नल बना दिया है। अनजान लोग पूल पर चढ़ने के चक्कर में पुल के रेलिंग से टकरा जाते हैं। कई लोग इस गफलत में रेलिंग से टकराते टकराते बचे जबकि दो लोग अंततः जान गंवा बैठे। इस दुर्घटना के बाद सडक बना रही कंपनी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने डायवर्जन सिग्नल को शून्य किया।
बढ़ रही सड़क हादसों से बचने के लिए अब एक ही रास्ता बचा है वह है दुर्घटना से देर भली स्लोगन पर अमल करना। रात के एक बजे से तीन बजे के बीच किसी भी कीमत में गाड़ी नहीं चलाना चाहिए। नींद का यह समय होता है। ज्यादातर दुर्घटनाओं की वजह चालक का नींद में आ जाना भी होता है। रात दिन के इस रफ्तार को रोकने में प्रशासन और सरकार भी नाकाम है। जिम्मेदार महकमा तो इधर सोचता ही नहीं।
जिले में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी एक भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बात की भी जांच नहीं की गई कि अप्रशिक्षित चालकों के हाथ में स्टेयरिंग कैसे है और कैसे टीन एजर को डीएल जारी किया जा रहा है। ऑटो और ट्रैक्टर के चालक आमतौर पर नशे में होते हैं लेकिन ऐसे चालक शायद ही पकड़ में आते हों।
एक सप्ताह के भीतर बड़े सड़क हादसों पर एक नजर
सदर कोतवाली क्षे़त्र के सिसवा अमहवा में ऑटो- ट्रक की टक्कर में चार लोगों की मौत, ग्यारह लोग घायल
पुरंदरपुर थाना क्षेत्र में बोकवा मोहनापुर बाईपास पर पुल के रेलिंग से टकराकर दो लोंगों की दर्दनाक मौत
नौतनवां थाना क्षेत्र में मुंडला गांव के पास जीप के ट्रक से टकराने में एक दर्जन लोग घायल
सदर कोतवाली में एक ऑटो पलट जाने से आधा दर्जन लोग घायल
कोल्हुई थाना क्षेत्र में खड़े ट्रक से टकराई पिकअप, पिकअप में सवार पांच लोग की मौत, कई घायल
BY- YASHODA SRIVASTAVA
Published on:
24 Jun 2018 08:26 pm

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