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बादल को चीर दुश्मनों पर गरजने वाले संजय चौहान हुए शहीद

जगुआर लड़ाकू विमान गुजरात के जामनगर वायुसैनिक अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

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Sanjay Chauhan

Sanjay Chauhan

मैनपुरी। भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान गुजरात के जामनगर वायुसैनिक अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें मैनपुरी के लाल एयर कमोडोर संजय चौहान की मौत हो गई। उनकी मौत की खबर से मैनपुरी में शोक की लहर दौड़ गई। उधर बेवर थाना क्षेत्र के गांव जासमई खास में उनकी मौत की खबर पहुंचते ही ग्रामीण उनके निवास पर पहुंचना शुरू हो गए।

लखनऊ में रह रहा परिवार
गांव जासमई के रहने वाले कर्नल नत्थू सिंह के पुत्र संजय चौहान भारतीय वायुसेना में एयर कमोडोर थे। मंगलवार को उनकी मौत की खबर मिलने के बाद पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बताया गया है कि नत्थू सिंह परिवार सहित लखनऊ में रह रहे हैं। इकलौते पुत्र होने के बाद भी कर्नल नत्थू सिंह ने अपने पुत्र को एयर फोर्स में भर्ती कराया। अपने काम के प्रति बेहद समर्पित रहने वाले संजय वर्तमान में एयर कमांडर बन गए थे। वायु सेना ने उन्हें एयर मार्शल के पद पर प्रोन्नति देने की तैयारी कर ली थी।


ये बोले परिवारीजन
ग्राम जासमई खास निवासी उनके चचेरे भाई चंद्र प्रकाश सिंह चौहान बताते हैं कि वे जब भी गांव आते थे। गांव के युवाओं को देश की सेवा के लिए प्रेरित करते थे। अपने दोस्तों के बीच में फौजी के रूप में चर्चित संजय का कहना था इस दुनिया में सीमाओं की रक्षा करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। बचपन से ही उन्हें जहाज चलाने का शौक था। सेना में नौकरी करने के बाद उनकी इच्छा पूरी हो गई।

यहां सिर्फ यादें
संजय चौहान का बचपन लखनऊ में बीता है। यहां पर उनका पैतृक मकान है, जिसमें अभी कोई नहीं रहता है। खानदान के अन्य सदस्य दूसरे मकान में रहते हैं। परिजनों ने बताया कि संजय का गांव से बेहद लगाव था और अकसर वे गांव आते जाते रहते थे। उनकी शिक्षा लखनऊ और मेरठ में हुई। बचपन से ही संजय को जहाज चलाने का शौक था और देश सेवा का जज्बा सीने में धधकता था। यही कारण था, कि संजय चौहान ने एयरफोर्स ज्वाइन किया।