
नवोदय प्रकरण
मैनपुरी। भोगांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रा की हत्या के मामले में जांच को लेकर पुलिस दिन—रात एक कर रही है। गुरुवार को इस मामले में सुबह करीब तीन बजे वार्डन और एक शिक्षक समेत तीन छात्रों को पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए लखनऊ ले जाया गया। बता दें कि इससे पहले सोमवार को भी तीनों छात्रों को इस टेस्ट के लिए ले जाया गया था, लेकिन नाबालिग होने के कारण टेस्ट की अनुमति नहीं मिली थी। इसके बाद पुलिस ने भोगांव लौटकर मंगलवार को किशोर न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर छात्रों के पॉलीग्राफी टेस्ट की अनुमति मांगी थी। किशोर न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद गुरुवार तड़के पुलिस लखनऊ के लिए रवाना हुई है। माना जा रहा है कि सभी का आज पॉलीग्राफी टेस्ट हो जाएगा। आइए जानते हैं पॉलीग्राफी टेस्ट से जुड़ी तमाम बातें।
जानिए क्या है पॉलीग्राफी टेस्ट
पॉलीग्राफी टेस्ट झूठ पकड़ने वाली तकनीक है। इसे लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। तमाम पेचीदा मामलों को सुलझाने में इसकी टेस्ट की मदद ली जाती है। इसमें व्यक्ति की बातचीत के दौरान कई तरह के ग्राफ बनते हैं, जिनके आधार पर ये पता लगाया जाता है कि वो सही कह रहा है या गलत। इसके अलावा पॉलीग्राफी टेस्ट का एक और तरीका भी होता है। कई बार व्यक्ति को एक साइकोएक्टिव दवा दी जाती है, दवा के बाद व्यक्ति ऐसी अवस्था में पहुंच जाता है, जिसमें न तो उसे होश होता है और न ही वो पूरी तरह से बेहोश होता है। इस दौरान उससे सवालों के जवाब लिए जाते हैं।
ऐसे मालूम पड़ता है सच और झूठ
टेस्ट की शुरुआत में व्यक्ति से उसका नाम पूछा जाता है। इस दौरान उसकी धड़कन, सांस और रक्तचाप के उतार चढ़ाव को ग्राफ़ के रूप में विशेषज्ञ नोट कर लेते हैं। इसके बाद उससे अचानक उस विशेष दिन की घटना के बारे में पूछा जाता है। यदि व्यक्ति के ग्राफ में परिवर्तन नहीं आता तो वो सच बोल रहा है। यदि अचानक सवाल से उस पर मानसिक दबाव पड़ता है और ग्राफ में परिवर्तन आता है तो माना जाता है कि वो झूठ बोल रहा है। इस तरह करके उससे कई सवाल पूछे जाते हैं जिनमें से कुछ उस घटना से संबन्धित होते हैं। इस टेस्ट को विशेषज्ञ करते हैं और वही इसके नतीजों का विश्लेषण करते हैं।
Updated on:
05 Dec 2019 05:03 pm
Published on:
05 Dec 2019 05:01 pm
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