कभी लगाते थे चाय का ठेला, नेता की मदद से बने अरबपति, जाने पूरी कहानी

बचपन में आर्थिक परेशानियां झेलकर कामयाब शख्यिसत बनने वालों में बलवंत सिंह राजपूत का नाम भी शुमार है। वह एक पॉलिटिशियन और सफल बिजनेसमैन हैं।

फर्श से अर्श तक का सफर तय करने वालों की खासियत यह होती है कि वह पूरे ध्येय के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हैं। बचपन में आर्थिक परेशानियां झेलकर कामयाब शख्यिसत बनने वालों में बलवंत सिंह राजपूत का नाम भी शुमार है। वह एक पॉलिटिशियन और सफल बिजनेसमैन हैं। राजपूत की कॅरियर जर्नी इंस्पायरिंग है, क्योंकि कठिनाइयों से गुजरते हुए वह सफल व्यवसायी बने।

गुजरात के पाटन जिले में बलवंत सिंह राजपूत का जन्म हुआ। उनके पिता एक ऑयल मिल में काम करते थे। जब वहां से नौकरी छूट गई तो वह सडक़ किनारे ठेला लगाकर चाय और सुपारी बेचने का काम करने लगे। राजपूत ने भी पिता की चाय की दुकान पर उनका हाथ बंटाना शुरू कर दिया। यह उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत था। साल 1972 में गुजरात में भयंकर बाढ़ आई, जिसमें उनका घर भी नहीं बचा। उस समय स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास बदलने के लिए एक जोड़ी कपड़े भी नहीं थे।

इस आपदा के बाद उन्होंने कांग्रेसी नेता जिन्नाभाई दारजी से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें अपने दो कमरे के घर में उचित मूल्य की दुकान शुरू करने की सलाह दी और जरूरी लाइसेंस भी दिलवाया। फिर सफल होना उन्होंने अपना लक्ष्य बना लिया। यहां से शुरू हुआ उनका यह सफर लगातार आगे बढ़ता गया। उनका गोकुल ग्रुप आज खास पहचान रखता है। गोकुल रिफॉइल्स एंड सॉल्वेंट लि. एडिबल्स ऑयल्स और इंडस्ट्रियल ऑयल की प्रमुख कंपनी है। इसी तरह गोकुल एग्री इंटरनेशनल लि. से भी उनका व्यवसाय आगे बढ़ा।

जब बिजनेस जम गया तो उन्होंने राजनीति में हाथ आजमाने का फैसला किया। उन्होंने कांग्रेस के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की। हालांकि बाद में मतभेदों के चलते वह भाजपा में शामिल हो गए। उनका मानना है कि कोई कितना भी सफल क्यों नहीं हो जाए, उसे कभी उन तकलीफों को नहीं भूलना चाहिए, जिनका सामना कर वह यहां तक पहुंचा है। किसी ने सही ही कहा कि लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

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सुनील शर्मा
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