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सुदर्शन पटनायक वह नाम, जो रेत पर अपनी भावनाओं को उकेरने में माहिर माने जाते हैं। सुदर्शन का जन्म ओडिशा के पुरी में 1977 में हुआ था। उन्हें बचपन में ड्रॉइंग और रंगों में खासी दिलचस्पी थी लेकिन उनका जीवन चुनौतियों से भरा हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह कलर, पेपर और पेंसिल आदि खरीद सकें।
उनके साथ एक अच्छी बात यह थी कि उनका घर समुद्र के किनारे था। ऐसे में रेत उनके लिए वह कैनवास बन गई। वह घर से सुबह जल्दी ही सागर तट पर चले जाते थे और सैंड पर कलाकृति तैयार करने में जुट जाते थे। इस दौरान वहां से जो लोग गुजरते, वो उनकी कलाकृति को बहुत सराहते थे। इससे उन्हें और बेहतर करने का प्रोत्साहन मिलता। उन्होंने रेत को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना लिया।
धीरे-धीरे रेत पर उनकी बनाई हुई आकर्षक कलाकृतियों के माध्यम से उन्हें पहचान मिलने लगी। उनके बनाए हुए सैंड स्कल्प्चर के लिए उन्हें अवॉर्ड मिलने लगे। इस कला के बूते पर वह पैसे भी कमाने लगे और देश-विदेश में उनकी शोहरत भी बढऩे लगी। वह अपने आर्ट फॉर्म में अधिकतर करंट सोशल इश्यूज को दर्शाते हैं। इनमें सोशल डिग्रेडेशन, सोशल इविल्स, सोसायटी आदि शामिल हैं।
उन्होंने एन्वायर्नमेंट, क्लाइमेट चेंज, रिलीजन, पॉल्यूशन, ग्लोबल इश्यूज, फेमस पर्सनैलिटीज पर सैंड स्कल्प्चर बनाए हैं। यही कारण है कि लोग उनके इन स्कल्प्चर्स से आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं। विश्व स्तर पर भी उन्होंने बहुत से अवॉर्ड अपने नाम किए हैं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है। दरअसल उन्होंने सांता क्लॉज का स्कल्प्चर 45 फीट ऊंचा स्कल्प्चर बनाया, जिसके लिए 1000 टन रेत की जरूरत थी।
मैसाचुसेट्स के बोस्टन में रीवर बीच पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्प्टिंग फेस्टिवल 2019 में उन्होंने पीपल्स चॉइस अवॉर्ड जीता। हाल ही में उन्हें इटैलियन गोल्डन सैंड आर्ट अवॉर्ड से नवाजा गया। उनकी सफलता की कहानी बताती है कि अगर आप अपने काम के प्रति समर्पित रहेंगे तो मुश्किलों के बावजूद सफल हो सकते हैं।
Published on:
16 Dec 2019 04:34 pm
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