24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रंग खरीदने के नहीं थे पैसे, मिट्टी से ही मूर्तियां बना कमाया नाम और दाम

सुदर्शन पटनायक को बचपन में ड्रॉइंग और रंगों में खासी दिलचस्पी थी लेकिन उनका जीवन चुनौतियों से भरा हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह कलर, पेपर और पेंसिल आदि खरीद सकें।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Sunil Sharma

Dec 16, 2019

startups, success mantra, start up, Management Mantra, motivational story, career tips in hindi, inspirational story in hindi, motivational story in hindi, business tips in hindi,

startups, success mantra, start up, Management Mantra, motivational story, career tips in hindi, inspirational story in hindi, motivational story in hindi, business tips in hindi,

सुदर्शन पटनायक वह नाम, जो रेत पर अपनी भावनाओं को उकेरने में माहिर माने जाते हैं। सुदर्शन का जन्म ओडिशा के पुरी में 1977 में हुआ था। उन्हें बचपन में ड्रॉइंग और रंगों में खासी दिलचस्पी थी लेकिन उनका जीवन चुनौतियों से भरा हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह कलर, पेपर और पेंसिल आदि खरीद सकें।

ये भी पढ़ेः 13 साल का 'बच्चा' करवाता है IAS की तैयारी, पढ़ाता है 1.87 लाख स्टूडेंट्स को

ये भी पढ़ेः एग्रीकल्चर में है शानदार स्कोप, कमाएं मोटा पैसा, जानें कॅरियर ऑप्शन

उनके साथ एक अच्छी बात यह थी कि उनका घर समुद्र के किनारे था। ऐसे में रेत उनके लिए वह कैनवास बन गई। वह घर से सुबह जल्दी ही सागर तट पर चले जाते थे और सैंड पर कलाकृति तैयार करने में जुट जाते थे। इस दौरान वहां से जो लोग गुजरते, वो उनकी कलाकृति को बहुत सराहते थे। इससे उन्हें और बेहतर करने का प्रोत्साहन मिलता। उन्होंने रेत को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना लिया।

ये भी पढ़ेः इन खास तरीकों से आप बन जाएंगे सबके चहेते, आज ही आजमाएं ये उपाय

ये भी पढ़ेः जॉन पॉल डेजोरियाः एक मामूली गुंडे से यूं बने अरबपति, पढ़े पूरी कहानी

धीरे-धीरे रेत पर उनकी बनाई हुई आकर्षक कलाकृतियों के माध्यम से उन्हें पहचान मिलने लगी। उनके बनाए हुए सैंड स्कल्प्चर के लिए उन्हें अवॉर्ड मिलने लगे। इस कला के बूते पर वह पैसे भी कमाने लगे और देश-विदेश में उनकी शोहरत भी बढऩे लगी। वह अपने आर्ट फॉर्म में अधिकतर करंट सोशल इश्यूज को दर्शाते हैं। इनमें सोशल डिग्रेडेशन, सोशल इविल्स, सोसायटी आदि शामिल हैं।

ये भी पढ़ेः कई बार फेल होने के बाद लगाया ऐसा दिमाग, अमरीका में जमा दी धाक

ये भी पढ़ेः गांव की लड़की को पति ने सिखाया मार्शल आर्ट, खली ने दी ट्रेनिंग, फिर बना दिया इतिहास

ये भी पढ़ेः कामयाब बिजनेसमैन बनने के लिए आजमाएं ये टिप्स तो होगा फायदा ही फायदा

उन्होंने एन्वायर्नमेंट, क्लाइमेट चेंज, रिलीजन, पॉल्यूशन, ग्लोबल इश्यूज, फेमस पर्सनैलिटीज पर सैंड स्कल्प्चर बनाए हैं। यही कारण है कि लोग उनके इन स्कल्प्चर्स से आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं। विश्व स्तर पर भी उन्होंने बहुत से अवॉर्ड अपने नाम किए हैं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है। दरअसल उन्होंने सांता क्लॉज का स्कल्प्चर 45 फीट ऊंचा स्कल्प्चर बनाया, जिसके लिए 1000 टन रेत की जरूरत थी।

मैसाचुसेट्स के बोस्टन में रीवर बीच पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्प्टिंग फेस्टिवल 2019 में उन्होंने पीपल्स चॉइस अवॉर्ड जीता। हाल ही में उन्हें इटैलियन गोल्डन सैंड आर्ट अवॉर्ड से नवाजा गया। उनकी सफलता की कहानी बताती है कि अगर आप अपने काम के प्रति समर्पित रहेंगे तो मुश्किलों के बावजूद सफल हो सकते हैं।