कोविड-19 से लड़ने के लिए शुरू हुए नए स्टार्टअप्स, जानिए क्या है खास

जहां एक ओर कोरोना वॉरियर्स ग्राउंड पर काम कर रहे हैं, वहीं कुछ स्टार्टअप्स भी नए टूल्स और प्रोडक्ट्स लेकर आए हैं। जानते हैं कि कोविड-19 से लडऩे में स्टार्टअप्स क्या कर रहे हैं-

भारत के कुछ उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार हमेशा एक प्रमुख विषय रहा है। कोरोना महामारी के दौरान यह पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उदाहरण के लिए आइआइएस की एक विंग द इनोवेशन एंड डवलपमेंट (एसआइडी) बेहतरीन काम कर रही है। बेंगलुरु स्थित यह इनक्यूबेटर कोविड-19 के खिलाफ काम करने वाले स्टार्टअप्स का मेजबान है। एसआइडी के एंटरप्रेन्योरशिप सेल के चेयरमैन सीएस मुरली कहते हैं कि आइआइएस के अनुसंधान व विकास के प्रयास उद्योग व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए उपयोगी हैं। कई स्टार्टअप्स ने कोविड-19 की स्थिति से निपटने के लिए समाधान विकसित किए हैं। इनकी मदद से युवा सरकार, चिकित्साकर्मी और नागरिकों की मदद कर रहे हैं।

संक्रमण की जानकारी
एआइ हेल्थ हाईवे ने कोविड-19 सेल्फ स्क्रीनिंग के लिए एक वेब आधारित ऐप विकसित किया है। यह यूटीलिटी संक्रमण की आशंका का पता लगाने के लिए विश्लेषण करती है और आवश्यक कार्रवाई का सुझाव देती है। यह शायद पहला ऐसा स्टार्टअप था, जिसने मार्च के मध्य में प्री-स्क्रीनिंग टूल लॉन्च कर रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन जोखिम मूल्यांकन को वर्गीकृत किया था। बाद में सरकार ने जिलों और जोन को मॉनीटर करने के लिए इसी तरह से बांटा था। यह शून्य, तीन, सात और चौदह दिनों में अनुक्रमिक स्क्रीनिंग का उपयोग करता है। यह पिन कोड काम लेता है।

टेस्ट के लिए उपयोगी
अजूका लाइफ साइंसेज ने न्यूक्लिक एसिड की ट्रेस मात्रा का पता लगाने के लिए रीएजेंट और किट विकसित किए हैं। आरटीपीसीआर आधारित टेस्टिंग के लिए इसके द्वारा आपूर्ति किए जाने वाला एक रीएजेंट वायरस को निष्क्रिय करता है और वायरस के आरएनए को स्थिर करता है और इस तरह कोरोना की रोकथाम में सहायता करता है। एक अन्य स्टार्टअप इक्वाइन बायोटेक दो तरह के टेस्ट को विकसित करने में अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है। एक टेस्ट ब्लड सैंपल से पता लगाता है कि कोविड-19 प्रोटीन्स में एंटीबॉडी मौजूद है या नहीं। दूसरा टेस्ट आरटीपीसीआर टेस्ट तकनीक को निर्धारित करता है। पैथशोध हेल्थकेयर ने कोविड-19 टेस्टिंग के लिए डायग्नोस्टिक डिवाइस तैयार किया है। यह हाथ में पकड़ा जा सकता है और इसका कॉन्सेप्ट यूनीक है।

मरीजों का इलाज
अब टेलीफोन पर समाधान और रिमोट क्लिनिकल मॉनिटरिंग के लिए टूल्स विकसित किए जा रहे हैं। इनसे टेलीमेडिसिन सर्विसेज विकसित करने में मदद मिल रही है। एआइ हेल्थ हाईवे के संस्थापक सतीश जीवनवर कहते हैं कि चिकित्सक इन टूल्स का इस्तेमाल प्रभावी स्क्रीनिंग और फोन पर परामर्श देने के लिए कर सकते हैं। इस तरह कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों और सामान्य मरीजों को अलग-अलग बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

कीटनाशक स्प्रे
जनरल एरोनॉटिक्स (जीए) ने एक ड्रोन विकसित किया है, जो खेतों में कीटनाशकों का छिडक़ाव कर सकता है। जब कोविड-19 महामारी आई तो जीए ने बड़े इलाकों के सेनिटाइजेशन के लिए तुरन्त अपने ड्रोन से कीटाणुनाशक स्प्रे करना शुरू किया। जीए टीम ने एक ड्रोन सर्विलांस के उद्देश्य से विकसित किया था, पर अब कोरोना महामारी के दौर में ड्रोन पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम जोडकऱ रिकॉर्डेड या लाइव ऑडियो मैसेज प्रसारित किया जाता है। बेंगलुरु में कीटनाशक स्प्रे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका के निर्देश पर 150 से ज्यादा स्प्रे मिशन संचालित किए जा रहे हैं। जीए के सीईओ अभिषेक बर्मन कहते हैं कि हम अपने ड्रोन के माध्यम से देश के सभी नगर पालिकाओं-निगमों और पुलिस बल की मदद करना चाहते हैं।

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सुनील शर्मा Desk
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