मंडला. ब्रह्माकुमारीज द्वारा 148 वीं बटालियन में रक्षाबंधन का कार्यक्रम रखा गया। जिसमें 148 वीं बटालियन, सीआरपीएफ कमांडेंट विक्रांत सारंगपाणि, डिप्टी कमांडेंट अरुण कुमार सिंह, मनीष कुमार एवं अन्य जवान उपस्थित रहे। ब्रह्माकुमारी ओमलता दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र बांधते समय सबसे पहले बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाती हैं जो आत्मस्मृति का प्रतीक है, उसके बाद रक्षासूत्र एकता का प्रतीक है और दो धागे में गठान लगाते हैं वह दृढ़ता का प्रतीक है। उसके बाद मुख मीठा कराया जाता है। इसका मतलब की हमेशा मुख से सदैव मीठी वाणी बोलते रहे।
ब्रह्माकुमारीज द्वारा 148 वीं बटालियन में रक्षाबंधन का कार्यक्रम रखा गया। जिसमें 148 वीं बटालियन, सीआरपीएफ कमांडेंट विक्रांत सारंगपाणि, डिप्टी कमांडेंट अरुण कुमार सिंह, मनीष कुमार एवं अन्य जवान उपस्थित रहे। ब्रह्माकुमारी ओमलता दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र बांधते समय सबसे पहले बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाती हैं जो आत्मस्मृति का प्रतीक है, उसके बाद रक्षासूत्र एकता का प्रतीक है और दो धागे में गठान लगाते हैं वह दृढ़ता का प्रतीक है। उसके बाद मुख मीठा कराया जाता है। इसका मतलब की हमेशा मुख से सदैव मीठी वाणी बोलते रहे।
ब्रह्माकुमारीज द्वारा 148 वीं बटालियन में रक्षाबंधन का कार्यक्रम रखा गया। जिसमें 148 वीं बटालियन, सीआरपीएफ कमांडेंट विक्रांत सारंगपाणि, डिप्टी कमांडेंट अरुण कुमार सिंह, मनीष कुमार एवं अन्य जवान उपस्थित रहे। ब्रह्माकुमारी ओमलता दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र बांधते समय सबसे पहले बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाती हैं जो आत्मस्मृति का प्रतीक है, उसके बाद रक्षासूत्र एकता का प्रतीक है और दो धागे में गठान लगाते हैं वह दृढ़ता का प्रतीक है। उसके बाद मुख मीठा कराया जाता है। इसका मतलब की हमेशा मुख से सदैव मीठी वाणी बोलते रहे।