
एंबुलेंस में सिर्फ एक ऑक्सीजन सिलेंडर, अस्पताल पहुंचते तक घुटने लगता है दम
मंडला. जिले में जब से 108 एंबलुेंस सुविधा की शुरूआत की गई है, तब से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज, घायलों, प्रसूताओं को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया है लेकिन समय के साथ ही अब जिले में अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की तरह 108 एंबुलेंस के संचालन में भी लापरवाही बरती जाने लगी है। एंबुलेंस में नियमानुसार दो ऑक्सीजन सिलेण्डर होने चाहिए लेकिन एंबुलेंस में सिर्फ एक ऑक्सीजन सिलेण्डर उपलब्ध कराया गया है तो किसी वाहन में दो सिलेण्डर हैं तो एक भरा हुआ है तो दूसरा खाली है। गौरतलब है कि जिले में कुल 108 वाहनों की संख्या 39 है। जिसमें ज्यादातर वाहनाें में एक ही आक्सीजन सिलेंडर दिया गया है जिसके चलते कई बार आपातकाल की स्थिति में मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता है।
जबलपुर से ही होते है रिफलिंग
जानकारी अनुसार जिले में संचालित 108 एंबलेंस में उपलब्ध कराए गए ऑक्सीजन सिलेण्डरों की रिफलिंग जबलपुर से होती है ऐसे में यदि सिलेण्डर खाली हो जाते हैं तो रिफिल सिलेण्डर मिलने में काफी समय लग जाता है इस दौरान यदि एंबुलेंस से ऐसे मरीज जिसे ऑक्सीजन की बेहद जरूरत हो उस मरीज की जान में बन सकती है। सूत्रों के अनुसार अधिकांश एंबुलेंस वाहनों में दो की जगह सिर्फ एक सिलेण्डर उपलब्ध कराए गए हैं। शनिवार की शाम एक 108 एंबुलेंस एक मरीज को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जब उस वाहन के स्टॉफ से ऑक्सीजन सिलेण्डर की उपलब्धता के बारे में पूछा गया तो स्टॉफ ने बताया कि दो सिलेण्डर उपलब्ध है जिसमें एक खाली है। इसी तरह जिला अस्पताल परिसर में एक महिला मरीज को रेफर केस में ले जाने की तैयारी थी इस 108 एंबुलेंस में लगे फ्लो मीटर में पानी ही नहीं भरा गया था। जानकारों के अनुसार किसी मरीज को ऑक्सीजन लगाते समय फ्लो मीटर में पानी में बुलबुले आने से यह जानकारी लगती है कि सिलेण्डर से नियमित ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है या नहीं। इस तरह स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद नाजुद हो गई है, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं है, मरीजों के लिए जरूरी दवाओं का टोटा बना हुआ है, मरीजों, घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन कर रहे 108 एंबुलेंस वाहनों में दो की जगह सिर्फ एक ऑक्सीजन सिलेण्डर उपलब्ध कराए गए हैं।
रेफर मरीजों के लिए जरूरी है ऑक्सीजन
जिले के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त स्टॉफ का अभाव है, कहीं इलाज के लिए डॉक्टर नहीं है तो कहीं मरीजों के लिए जरूरी दवाओं का टोटा है ऐसी स्थिति दूर-दराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर जिला अस्पताल तक की है और यही कारण है कि छोटी-छोटी बीमारियों, दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल से जबलपुर मेडिकल रेफर केस में मरीजों 108 एंबुलेंस से ले जाना पड़ता है, इनमें कई ऐसे मरीज भी होते हैं जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में यदि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेण्डर खाली हों या फिर पर्याप्त सिलेण्डर न हो तो इससे मरीजों की जान पर बन सकती है।
Published on:
21 May 2023 08:07 pm
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