सोमवार को आई मौनी अमावस्या पर शुभ संयोगों की बौछार
मंडला। माघ मास में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या का हर हरि भक्त को इंतजार रहता है क्योंकि मान्यता है कि इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है और इसलिए इस दिन संगम में स्नान करने से महा पुण्य फल मिलता है। यही कारण है कि आज 4 फरवरी को मौनी अमावस के दिन नर्मदा के तटों पर भक्तों की भीड़ उमड़ेगी और श्रृद्धालु नर्मदा स्नान कर श्री विष्णु और महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे।
कहा जाता है कि इसी दिन कुंभ में पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। यही वजह है कि संगम घाटों पर आज सैकड़ों की तादाद में भक्तों के पहुंचने की संभावना है।
यह है महत्व
सूर्य कुंड निवासी ज्योतिषाचार्य एवं पंडित राकेश शास्त्री ने बताया कि माघ के महीने में स्नान का महत्व कार्तिक मास की तरह ही श्रेष्ठ है। मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और शिव जी का पूजन करना पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन प्रयागराज में मौजूद पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान कर अन्न, वस्त्र, धन, गौ आदि का दान करने का विधान भी बताया गया है। इस दिन मौन रहकर व्रत रखने का विशेष महत्व माना गया है। मौनी अमावस्या पर मौन रहने से पुण्य लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन प्रात:काल में स्नान करके सूर्य को दूध और तिल से अघ्र्य देना भी लाभकारी होता है। इस पूरे ही दिन अन्न, वस्त्र और स्वर्ण का दान अक्षय फलदायक होता है। इसी दिन कुंभ में पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। यही वजह है कि संगम घाटों पर आज सैकड़ों की तादाद में भक्तों के पहुंचने की संभावना है।