बजट में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और रोजगार
मंडला. प्रदेश सरकार जल्द ही बजट पेश करने वाली है। जिसको लेकर लालीपुर में टॉक शो आयोजित किया गया। जिसमें युवा सहित सभी वर्ग ने अपनी बात रखी। सभी ने कहा कि बजट में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और रोजगार बढ़ाने के प्रावधानों की अपेक्षा है। कॉलेजों में युवाओं को दी जाने वाली शिक्षा रोजगार परक होनी चाहिए। उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए प्रशिक्षण मिलना चाहिए। इसके साथ सरकारी कॉलेजों में भी केम्पस सिलेक्शन होना चाहिए। युवाओं को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़े।
बजट में बेरोजगारी और महंगाई के दंश से पीड़ित वर्ग के लिए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट अनुपात को दृष्टिगत रखते हुए आवंटन किया जाना चाहिए।
आकाश उईके, कॉलेज छात्र
मिड डे मील गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए ताकि बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। स्वस्थ्य रहने से बच्चे बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे।
आदर्श रघुवंशी, विद्यार्थी ।
हम तो यही उम्मीद करते हैं कि बजट युवाओं का पूरा ध्यान रखने वाला हो। कोरोना के बाद से युवाओं की नौकरी पर संकट बन आया है। पुरानी नौकरियां गई हैं, नई हैं नहीं। रोजगार का सिर्फ वादा ही नहीं किया जाना चाहिए बल्कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था होना चाहिए।
दुर्गेशगिरी गोस्वामी, समाजसेवी
दो चार गांवों के बीच कम से कम एक हायर सेकंडरी स्कूल होना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई हो सके। मौजूदा समय में दूर-दराज क्षेत्रों में विद्यालय होने से बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। खासकर छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
विकास गुप्ता, समाजसेवी
छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्हें आवागमन की सुविधा मुहैया कराई जानी चाहिए ताकि छात्राएं दूर दराज के गांवो से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहरों में मौजूद महाविद्यालयों में सुरक्षित तौर पहुंच सकें और अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने पैरों पर खड़ी हो।
शैलजा यादव, विद्यार्थी
शिक्षा बजट में ज्यादा से ज्यादा कच्ची बस्तियों में आंगनबाड़ियों का निर्माण कराना चाहिए। इससे महिलाओं को रोजगार के साथ कच्ची बस्तियों में पन्नी बीनने और जरूरतमंद बच्चे शिक्षा से जुड़ जाएंगे। शिक्षित समाज के लिए यह शिक्षा नींव मजबूत होनी चाहिए।
गोल्डी चौरसिया, समाजसेवी