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मवेशियों व पक्षियों की प्यास बुझाने महिलाओं ने उठाया बीड़ा

घर में कर रहे पानी की व्यवस्था

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मवेशियों व पक्षियों की प्यास बुझाने महिलाओं ने उठाया बीड़ा

मवेशियों व पक्षियों की प्यास बुझाने महिलाओं ने उठाया बीड़ा

मंडला. सूरज की तपन दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में पानी की आवश्यकता हर किसी को महसूस होती है। चाहे इंसान हो या बेजुबान मवेशी या पक्षी पीने के पानी के लिए भटकते रहते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन बेजुबानों की प्यास बुझाने का काम कर रहे हैं। उनमें महिलाएं भी आगे आई हैं।

महिलाओं एवं बच्चों के द्वारा घर की छत और आंगन में मिट्टी के बने या अन्य पात्र में सकोरे रखकर नेक काम किया जा रहा है। जिससे परिंदंो का जीवन बचाया जा सके। बता दें कि आसमान में उड़ते पक्षियों को जब भूख प्यास लगती है तो वे हमारे घर की छत पर आकर बैठ जाते हैं और अपनी ध्वनि में आवाजें करते हैं तब हमारा प्रयास होना चाहिए कि पानी से भरे सकोरे और भूख मिटाने के लिए दाना या अन्य खाद्य सामग्री रखकर पक्षियों को राहत दी जाए, जिससे उनका जीवन सुरक्षित रह सके। जिला मुख्यालय के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ जागरूक लोग अपने अपने घरों के सामने, छतों पर, पेड़ों समेत अन्य स्थानों पर पशु पक्षियों को पानी पिलाने के लिए कई प्रकार की सुविधा करने लगे है। जिससे गर्मी में इन बेजुबानों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि मवेशियों के लिए भी कोटना अपने घरों के सामने रखना चाहिए। पानी का दुरूपयोग ना करें, उस पानी को घर के बाहर इन मवेशियों, पक्षियों के लिए रख दें। गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है। सुबह आंखें खुलने के साथ ही घरों के आस-पास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी के मन को मोह लेती है।

घरों के बाहर फुदकती गौरेया बच्चों सहित बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। देवदरा पंचायत की महिलाओं का कहना है कि गर्मियों में घरों के आसपास पक्षियों की चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका विशेष ख्याल रखें। जिले में गर्मी भी अपनी चरम सीमा में है। जिले का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है, तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी की संभावना भी है। जिससे गर्मी में मनुष्य के साथ सभी प्राणियों को पानी की आवश्यकता होती है।

मनुष्य तो पानी का संग्रहण कर रख लेता है, लेकिन परिंदे व पशुओं को तपती गर्मी में यहां-वहां पानी के लिए भटकना पड़ता है। पानी न मिले तो पक्षी बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। पशु पक्षियों की पानी की समस्या देखकर जिले के कुछ युवा, बच्चे, महिलाएं इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था अब प्रतिवर्ष गर्मी शुरू होते ही करते है, कर रहे है, जो सराहनीय है। पर्यावरण के प्रति प्रेम एवं पर्यावरण जागरूकता का संदेश देने स्कूली छात्र, छात्राएं भी आगे आ रहे है। पर्यावरण में जल एवं पशु पक्षी भी हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। जिस प्रकार स्कूल की इमारत बच्चों के बिना सौंदर्य नहीं बिखेरती, उसी प्रकार जल एवं पशु पक्षियों के बिना पर्यावरण सुंदर नहीं लगेगा। पर्यावरण में जल एवं जीव जंतुओं को सुरक्षित एवं संरक्षित करने स्कूलों के कई छात्र, छात्राओं ने पक्षियों के लिए सकोरे रखे। गर्मी के मौसम में जल का महत्व एवं पशु पक्षियों के लिए प्रेम का संदेश इन छात्रों के द्वारा दिया गया एवं समाज के अन्य लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया।