
अमृत के तालाब से 167 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित तो अप्रत्यक्ष रुप से 250 हेक्टेयर
मंदसौर.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर जिले में ७५ अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य दिया। जिले में लक्ष्य से अधिक तालाब बनाने पर काम शुरु किया। और इसमें से १५ बनकर तैयार हो गए है तो बाकी भी ८० प्रतिशत बन चुके है। लेकिन इस प्रोजेक्ट में ८० तालाबों पर काम चल रहा है और सभी वर्तमान में लबालब भरे है। इससे यह अमृत के सरोवर रबी सीजन में सिंचाई में किसानों के लिए मददगार होंगे। अमृत के इस प्रोजेक्ट में जिले में बन रहे तालाबों से ६ लाख ५७ हजार ७५६ घनमीटर जल संग्रहण क्षमता में बढ़ोतरी होगी तो वहीं १६७ हेक्टेयर भूमि प्रत्यक्ष तो २५० हेेक्टेयर भूमि अप्रत्यक्ष रुप से सिंचित होगी। इतना ही नहीं गांवों में जलस्रोत इससे रिचार्ज भी होंगे। खास बात तो इसमें यह है कि ८० में से भी जिला पंचायत को सिर्फ ५२ पर ही काम करना पड़ा। २८ तालाब तो एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनी तैयार कर रही है। हालंाकि प्रोजेक्टा को देखे तो १५ तालाब अब तक पूरे हुए है और अमृत के इस प्रोजेक्ट को अप्रेल २०२३ तक पूरा करना है।
८० तालाब पर चल रहा काम, अगले साल अप्रेल में होना है पूरे
जलाअभिषेक अभियान के अंतर्गत इस पर काम शुरु किया गया। अमृत सरोवर प्रोजेक्ट में पटेला, कोलवा, धुंधडक़ा, पिपलिया कराडिय़ा, आगर बरखेड़ा नायक, सालरिया, संधारा सहित कई जगहों पर काम चल रहा है। गरोठ व भानपुरा क्षेत्र में सबसे अधिक तालाब बन रहे है। वहां २८ तालाब एक्सप्रेस निर्माण कंपनी बनाकर तैया कर रही है। वहीं जिला पंचायत ५२ तालाब पर काम कर रही है। इस पर ७९५.५८ लाख रुपए खर्च की जाएगी। यानी आगामी एक साल में जिन पंचायतों में यह तालाब बन रहे है वह सब बनाकर तैयार करने की जिला पंचायत के सामने बड़ी चुनौती है। इनमें से दो जगहों पर तालाब में मत्स्य पालन भी कराया जाएगा तो एक जगह सिंघाड़े की खेती समूह के माध्यम से करने के लिए दिया जाएगा।
गिरते भूजल स्तर को उठाने का काम करेगा अमृत सरोवर प्रोजेक्ट
जिले में भूजल स्तर में हर साल गिरावट हो रही है। मई-जून माह में हर साल 40 मीटर से नीचे तक जल स्तर पहुंच जाता है। सबसे ज्यादा मंदसौर और सीतामऊ ब्लॉक में भू-जल स्तर सतही तल पर पहुंच रहा है। डार्क जोन में जिले के यह दोनों ब्लॉक है। जलाअभिषेके अभियान में शुरु हुआ अमृत प्रोजेक्ट जलस्रोतों के साथ भूजल स्तर को उठाने का काम करेगा। अमृत के इस प्रोजेक्ट से बारिश के पानी को गांवों में बहने से रोकते हुए तालाबों में एकत्रित किया जाएगा। इससे भू-जल स्तर में तेजी से सुधार होगा। इसके साथ सिंचाई और पेयजल में भी पानी की कमी दूर हो सकेगी।
समय-सीमा में पूरा करना बड़ी चुनौती
हालांकि अमृत प्रोजेक्ट को समय-सीमा में पूरा करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। ८० में से २८ तो एक्सप्रेस निर्माण कंपनी को दे दिए। वह इस पर काम कर रही है तो वहीं ५२ पर जिला पंचायत नरेगा के माध्यम से काम करवा रही है। इसमें से १५ ही शतप्रतिशत पूरे हो पाए है। अनेक तालाब है जिनका काम शतप्रतिशत होना है। हालांकि तालाबों का काम पूर्णयता की ओर है लेकिन बारिश में पानी भर जाने के कारण भी काम रुका हुआ है। ऐसे में अगले साल अप्रेल तक इसे पूरा करना बड़ी चुनौती है।
सभी तालाब लबालब भरे
अमृत सरोवर में पहले १०२ तालाबों बनाने का लक्ष्य लिया था। बाद में ८० किया गया। शासन से जिले में ७५ अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य दिया था। इसमें ५२ तो नरेगा में वाटर शेड के माध्यम से बनाए गए है तो वहीं २८ तालाब एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनी तैयार कर रही है। बारिश के बाद सभी तालाबों में लबालब पानी भरा है। इससे १६७ हेक्टेयर प्रत्यक्ष व २५० हेक्टेयर अप्रत्यक्ष रुप से भूमि सिंचित होगी। जिले में ६ लाख ५७ हजार ७५६ घनमीटर जल संग्रहण क्षमता भी बढ़ेगी। -कुमार सत्यम, सीईओ, जिला पंचायत
Published on:
05 Sept 2022 12:44 pm

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