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काले सोने में सीपीएस सिस्टम में किसानों को रुलाया, अब तक स्थिति नहीं स्पष्ट

काले सोने में सीपीएस सिस्टम में किसानों को रुलाया, अब तक स्थिति नहीं स्पष्ट

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काले सोने में सीपीएस सिस्टम में किसानों को रुलाया, अब तक स्थिति नहीं स्पष्ट

काले सोने में सीपीएस सिस्टम में किसानों को रुलाया, अब तक स्थिति नहीं स्पष्ट


मंदसौर.
काला सोना कही जाने वाली अफीम की खेती में सीपीएस सिस्टम इस बार किसानों के लिए मुश्किल भरा साबित हो रहा है। रबी सीजन की उपज निकल गई। यहां तक की अफीम भी निकल कर घर आ चुकी है। अब तोल केंद्र शुरु होते ही वहां जाएगी लेकिन सीपीएस में ना दाम तय है और ना ही इनके कटने का समय तय हो पाया है। ऐसे में अब किसान जब खेत खाली हो गए तो अफीम की निगरानी रतजगा कर करने को मजबुर है। सीपीएस सिस्टम के नए फॉर्मूले में किसानों ने हरे रंग के पट्टें लेकर खेती तो कर ली लेकिन अब उलझ गए है। सीपीएस सिस्टम लागू करने के बाद सरकार ने आगे की नीति जारी नहीं की। सीपीएस में चीरा लगाने के बाद अब विभाग की टीम के सत्यापन के बाद काटना है लेकिन यह कब यह भी तय नहीं है। विभाग व किसान दोनों ही पसोपेश में है। अब तक सफेद लाइसेंस लेकर खेती करने वाले किसानों को जो सीपीएस की जद में आए है उन्हें पहली बार हरे रंग का लाइसेंस मिला।


रतजगा कर कर रहे रखवाली तो बांधकर हवा से बचा रहे
वर्तमान में गर्मी बढऩे के साथ तेज हवाओं का दौर भी शुरु हो गया है। और खेत भी खाली हो गए है। ऐसे में किसानों ने अफीम को हवा से गिरने से बचाने के लिए खेतों में बांध दिया है। तो खाली खेतों में सीपीएल वाले अफीम की निगरानी करना पड़ रही है। सभी अफीम खेतों में अफीम को बांधकर हवा में सुरक्षित किया जा रहा है तो कई दिनों से अफीम की रखवाली किसान रतजगा कर रहे है। कोई डोडे ना चुरा ले और पक्षी डोडों को नुकसान ना पहुंचा दे इसके लिए भी खेतों पर खास इंतजाम किए गए है। दिन और रात किसान खेतों पर ही सुरक्षा के लिए बीता रहे है। सीपीएस में अफीम की खेती से किसान उलझन में है।


सीपीएस सिस्टम में जिले में २ हजार से अधिक को मिलेगा लाइसेंस
सीपीएस सिस्टम में पहले उन्हें लिया गया जिन्होंने पिछले साल मार्फिन दी लेकिन वह ४.२ से ३.७ के बीच में रहे। ऐसे जिले में तीनों खंडों में किसान है। इसके साथ इसके पूर्व दो सालों के आंकड़ो में जिनके पट्टें कटे उन्हें भी सीपीएस में शामिल कर हर एक किसान को ६ ऑरी का सीपीएस सिस्टम के तहत पट्टा दिया जा रहा है। तीनों खंडों में मिलाकर ऐसे किसानों की संख्या २२३७ है। सीपीएस की जद में आए किसानों को नवंबर में पट्टे जारी हुए। चीरा नहीं लगाने तक की जानकारी है लेकिन अब कब यह काटें जाएंगे और विभाग को कब देना है। यह तय नहीं।


५३१ गांवों में १३८१३ पट्टेधारियों के लिए ६ अप्रेल से शुरु हो रहा तोल
दीपोत्सव से पहले नीति जारी होने के साथ जिले के तीनों खंडों में ५३१ गांवों में १३ हजार ८१३ उन किसानों को सामान्य सफेद लाइसेंस के साथ पट्टें दिए गए जिनकी मार्फिन ४.२ से अधिक थी। मार्फिन के आधार पर ६ से लेकर१० और १२ ऑरी तक के पट्टें इन किसानों को मिले है। हालांकि ६ ऑरी वाले किसानों की ही संख्या अधिक है। इन किसानों ने अफीम की बोवनी भी कर दी है। इनकी अफीम फसल आ चुकी है अब इन पट्टेधारियोंके लि जिले में ६ अप्रेल से तोल शुरु होगा इसकी तैयारियों का दौर चल रहा है। अफीम खंड तीन का सीतामऊ में होगा तो अफीम एक और दो खंड का तोल नारकोटिक्स कार्यालय में ही होगा। इसके बाद विभाग की टीम सीपीएस वाले खेतों पर पहुंचकर सत्यापन करेगी और इसके बाद काटने की अनुमति होगी। फिर किसान डोडो से खसखस के दाने छेद करके निकालेगा और इसके बाद कटे हुए डोडे विभाग को भेजें जाएंगे।