मंदसौर.
बारिश का दौर शुरु हो गया है। लेकिन नपा फिर भी गंभीर नहीं है। शहर में जर्जर हो चुके मकान भले ही पिछले सालों में हादसों का कारण बने हो लेकिन इस बार भी नपा ने अब तक सिर्फ जर्जर को चिन्हित कर उन्हें नोटिस भेजने का काम किया है। इसके बाद यहां आकर किसी ने झांका तक नहीं। इधर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जर्जर मकान हादसों को हर समय न्योता दे रहे है। शहर के पुराने आबादी वाले क्षेत्र में जर्जर मकानों की संख्या अधिक है। जहां बारिश के शुरु होने के साथ जर्जर मकान फिर खरतनाक लग रहे है। कुछ मकान ऐसी स्थिति में ही तेज वर्षा और हवा, आंधी के दौरान गिर सकते है। किसी भी तरह की घटना होने पर नपा नोटिस का हवाला देकर मकान मालिक को जिम्मेदार ठहरा देगी।
नपा के रिकॉर्ड में सिर्फ ३६ जर्जर मकान, असल स्थिति अलग
शहर में नपा के सर्वे के अनुसार 36 मकान जर्जर मिले थे। सभी को नपा ने नोटिस जारी किए। इसके बाद अभी भी नपा के रिकार्ड के अनुसार 28 मकान जर्जर हालत में है। वर्षा होते ही इन मकानों की दीवारें गीली होने से अब खतरा और बढ़ गया है। लेकिन नगरपालिका ने हर साल की तरह इस साल भी सभी को नोटिस देकर अपना काम पूरा कर लिया। इसके अलावा जर्जर मकानों से कोई हादसे न हो, इसके लिए नपा ने कुछ भी नहीं किया है। जबकि कई क्षेत्रें में मकान इतने खतरनाक स्थिति में है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई मकानों में ताले लगे हैं तो कुछ में लोग रह रहे हैं। नगर पालिका के आंकड़ों में नगर में 2015 में भी 36 मकान जर्जर थे। इसके बाद इनकी संंख्या 2018 तक 22 हो गई थी। पांच सालों में नपा के ही रिकार्ड में 36 मकान जर्जर हो गए है और इनमें से 8 मकानों के मालिकों ने जर्जर हिस्से या मकानों को गिरा लिया है। अब शहर में 28 मकान नपा के रिकार्ड में जर्जर हालत में है। जबकि हकीकत में शहरभर में जर्जर मकानों की संख्या 100 से अधिक है।
2018 में कलेक्टर ने दिए थे जर्जर मकानों को चिन्हित कर गिराने के आदेश
अप्रेल 2018 में इंदौर में एक जर्जर मकान गिरने के हादसे के बाद मंदसौर के तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने 10 अप्रेल को समय सीमा संबंधी बैठक में नपा की तत्कालीन सीएमओ सविता प्रधान को आदेश दिए थे कि शहर के जर्जर भवनों को चिन्हित कर गिराने की कार्रवाई की जाए। जहां जनहानि की आशंका हो, उसे तत्काल गिराया जाए। इस आदेश के बावजूद नपा ने जर्जर भवनों की स्थिति नहीं देखी।
इन क्षेत्रों में अधिक हैं जर्जर मकान
शहर के पुराने मोहल्लो में जर्जर मकानों की संख्या अधिक है। कोलगर गली, शहर किला रोड, जनकुपुरा, राम मोहल्ला, तुलसीदास गली, नजमपुरा, तैय्यबपुरा, नृसिंहपुरा, श्रृंगार गली आदि क्षेत्र शामिल हैं।
अब तक जर्जर मकानों से हुए हादसें
-12 साल पहले सम्राट मार्ग पर एक मकान ढहने से महिला की मौत हो गई थी।
-वर्ष 2014 में वर्षा के दौरान नयापुरा रोड पर जर्जर मकान का छज्जा गिरने से मजदूर घायल हो गया था।
-2017 में बोहरा बाखल में एक मकान गिर गया था, हालांकि जनहानि नहीं हुई थी।
-वर्ष 2017 में तुलसीदास गली में जर्जर मकान की दीवार ढही थी।
-16 अगस्त 2019 को तुलसीदास गली में तीन जर्जर मकानों के हिस्से गिरे थे।
-9 अगस्त 2019 को मंडी गेट के समीप करीब 100 वर्ष पुराना मकान ढह गया। इसी दिन भानपुरा में भी एक जर्जर मकान गिरा था।
-छह सितंबर 2019 को नीम चौक जागेश्वर मंदिर के पास एक जर्जर मकान का हिस्सा गिर गया था।
-2019 में जर्जर मकान गिरने से पिपलियामंडी, शामगढ़ एवं गरोठ क्षेत्र में दो मासूमों सहित तीन लोगों की मौत हुई थी।
-8 जुलाई को 2022 को नीम चौक जागेश्वर मंदिर के पास का जर्जर मकान गिर गया।
मकान मालिक होंगे जिम्मेदार
सर्वे में शहर में 36 मकान जर्जर मिले थे। इनमें से 8 लोगों ने मकानों के जर्जर हिस्से को हटा दिया है। बाकी सभी को नोटिस जारी कर कहा कि स्वयं अपने जर्जर मकानों को तोड़ ले। किसी तरह की घटनाए दुर्घटना होती है तो मकान मालिक जिम्मेदार होंगे। -सुधीरकुमारसिंह, सीएमओ