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अफीम को बचाने कही गाने तो कही डिब्बे बजाकर पक्षियों को भगाने के लिए हो रहा जतन

अफीम के खेतो पर किसानों का पहरा लगा हुआ है।

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mandsaur news

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मंदसौर
लिंबावास सहित आसपास क्षेत्र में अफीम के खेतो पर किसानों का पहरा लगा हुआ है। जल्द ही अफीम के डोडे पर मंगल चीरा लगने वाला है। तो वहीं सीपीएस के पट्टों पर अफीम की खेती करने वाले किसान भी अपने अफीम की सुरक्षा में खेतों पर रात बीता रहे है। काला सोना कही जाने वाली अफीम की फसल अब पूरे शबाब पर है। कुछ ही दिनों में चीरा लगाने की प्रक्रिया भी शुरु हो जाएगा। लेकिन प्राकृतिक कारणों और अब रोग के प्रकोप के कारण किसान व विभागीय अमला फसल को देख उत्पादन प्रभावित होने की आशंका किसान जता रहे है। जिले में लहलहाती अफीम फसल पर सफेद मस्सी ग्रहण लगा रही है। ऐसे मे काला सोना कही जाने वाली अफीम फसल का उत्पादन भी इस बार प्रभावित होने कि आशंका है। इस बार अफीम ने काली-सफेद मस्सी से लेकर अन्य रोगों की मार झेली है।
अफीम की फसल पर फूल व डोडे आने के साथ पक्षियों से बचाने के लिए नेट तो नीलगाय से बचाने के लिए खेतों पर चारदीवारी बना रखी है। वहीं रातभर किसान यहां पहरा दे रहे है। वर्तमान में जिले के कुछ गांवो में दो या चार दिन में चीरा लगने वाला है। करीब २० से २५ दिन में अफीम की पूरी फसल पर चीरा लगने की प्रक्रिया शुरु हा जाएगा। इस वर्ष प्रत्येक किसानो को १०-१० आरी के पट्टें दिए जा रहे है। इस बार उत्पादन प्रभावित होने के चलते अनेक किसान मार्फिन पूरा करने की चुनौती के बीच पट्टा कटने की आंशक के कारण भी चिंतित है। ऐसे में अफीम की सुरक्षा के लिए किसान बिना जोखिम लिए पूरी मेहनत कर रहे है। कई कारणों के चलते अफीम उत्पादन प्रभावित होने कि आंशका लग रही है।
मौसम खुलते ही अचानक फसल पर आया काली मस्सी का रोग
किसान पूखराज धनगर ने बताया कि हमने अफीम फसल की बोवनी करते हुए करीब ९५ दिन हो गए है अचानक फस्ल पर काली मस्सी ओर सफेद मस्सी का रोग आ गयाथा। अब मौसम साफ हुआ तो काली मस्सी का रोग फिर से आ गया है। ऐसे में किसान कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव कर रहा है। फसल आने के साथ किसान अब अफीम के खेत पर पक्षियोंं को भगाने के लिए तरह-तरह के जतन करते हुए दिखायी दे रहे है। खेतों पर कही प्रकाश व्यवस्था की गई है तो कही किसान डिब्बे व बर्तन के साथ गाने बजाकर पक्षियों को भगाने में लगे हुए है।
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