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अफीम निकाल रहे किसान तो दूसरी ओर पुलिस ने तस्करी पर रोक लगाने ‘कसी कमर’

अफीम के करीब साढ़े १९ हजार लाइसेंस

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मंदसौर

जिले में काला सोना कहे जाने वाली अफीम के करीब साढ़े १९ हजार लाइसेंस है। अफीम फसल को इन दिनों डोडोंं से निकाला जा रहा है। किसान लुनाई चिराई के कार्य में व्यस्त है। तो दूसरी ओर इस नए सीजन में तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक ने येाजना बनाई है। और जिले के सभी थानाप्रभारियों से लेकर चौकी प्रभारियों को अलर्ट रहने के साथ-साथ कार्रवाई करने के लिए निर्देशित भी कर दिया है। और इस मामले में कोताही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी करने के लिए अधिकारियों को कहा है।
पुलिस के आंकड़ों को देखे तो 2022 में तस्करों से एक करोड़ 85 लाख रूपए से अधिक को डोडाचूरा गत साल पकड़ा तो एक करोड़ 43 लाख रूपए की अफीम पकड़ी। जो मंदसौर.नीमच जिले से तस्करी हुई है। उस आंकड़े का अनुमान नहीं लगा सकते है।
वर्तमान में अफीम फसल पर चीरा लगाकर अफीम निकालने का कार्य चल रहा है। इस बीच हाल ही में ही मल्हारगढ़ पुलिस ने अफीम पकड़ी तो सीतामऊ और भानपुरा पुलिस ने डोडाचूरा की तस्करी करते हुए तस्करों को पकड़ा है।
मुखबिर के अलावा अन्य नेटवर्क भी तैयार करने के निर्देश
पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस का सबसे महत्वपूर्ण अंग मुखबिर तंत्र होता है। जिससे तस्करों को पकडऩे में काफी सहायता मिलती है। इस तंत्र को ओर मजबूत करने के साथ-साथ एक नया नेटवर्क तैयार करने के लिए भी निर्देश दिए है। इसके अलावा जिन रास्तों पर सबसे अधिक तस्करी होती है। उन रास्तों पर रात के समय गश्त बढ़ाने के लिए भी सख्त निर्देश पुलिस अधीक्षक ने दिए है। वहीं जो तस्कर वर्तमान में जमानत पर बाहर है या जिनकी तस्करी की शोहरत है। उन पर निगाहें रखने के लिए भी कहा गया है।
प्रदेश में सबसे बड़ा गढ़ मंदसौर.नीमच
प्रदेश में सबसे बड़ा गढ़ मंदसौर.नीमच संसदीय क्षेत्र है। यहां से सबसे अधिक अफीम.डोडाचूरा की तस्करी होती है। तस्कर जब अफीम फसल खड़ी होती है तो फसल देखकर ही सौदा कर लेते है। विभाग के द्वारा कितनी अफीम किसान को तौल में देना यह तय नहीं किया गया है। ताकि किसान अधिक से अधिक अफीम तौल में लेकर आए। विभाग के अधिकारियों की माने तो 10 आरी में करीब साढ़े सात किलो से लेकर साढ़े नौ किलो तक अफीम की पैदावार होती है। अफीम का पट्टा तब बचता है जब 4.5 मार्फिन इस में होना चाहिए। इससे कम में पट्टा कट जाता है। अच्छी क्वालिटी की अफीम होती है तो 7 हजार रूपए किलो तक के भाव किसान को मिलते है। वही तस्कर एक लाख रूपए किलो तक में इसको लेते है। और जैसे.जैसे राज्य बढ़ते है। वैसे.वैसे इसकी रेट भी बढ जाते है।