कालाबाजारी रोकने विभाग ने की सख्ती तो किसानों की बढ़ गई मुसीबत
मंदसौर.
जिले में यूरिया खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती अब किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। हालांकि इस सख्ती से बहुत हद तक कालाबाजारी पर नकेल तो कसने का प्रयास किया है लेकिन इससे किसानों को चक्कर काटना पड़ रहा है। आधार कार्ड के साथ जमीन की पावती लगाना पड़ रही है तो वहीं विभागीय अधिकारी निजी यूरिया दुकान पर नजरें जमाए हुए है। दस्तावेज लेने किसान फिर से घर जा रहे है तो वहीं दो बीघा पर एक कट्टा यूरिया का मिल रहा है। विभाग का दावा है कि जिले में कही पर भी खाद विशेषकर यूरिया की किल्लत नहीं है लेकिन फिर भी किसान यूरिया के लिए खाद विक्रय केंद्रों पर कतारों में खड़ा हुआ है। इधर प्रशासनिक अधिकारी व विभागीय अधिकारी भी खाद की लगातार समीक्षा कर रहे है।
ऐसे परेशान हो रहे किसान
जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने यूरिया खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए तमाम प्रकार की सख्ती इन दिनों कर दी है। इसमें निजी खाद के केंद्रों पर ग्रामीण विस्तार अधिकारियों की ड्युटी लगाई है तो वहीं दो बीघा जमीन पर सिर्फ एक कट्टा यूरिया खाद मिल रहा है। इसके साथ ही आधार कार्ड के अलावा जमीन की पावती दिखाने के अलावा मशीन पर थंब भी किसान को लगाना पड़ रहा है। तब जाकर किसान को यूरिया मिल रहा है। कई किसान जरुरत से अधिक खाद लेकर स्टॉक करने का काम करते है तो कई किसानों को केंद्र पर पहुंचने के बाद यह दस्तावेज लेने के लिए फिर से गांव आना पड़ रहा है। ऐसे में वह परेशान हो रहे है। लेकिन इस सख्ती से खाद की कालाबाजारी करने वाले लोगों में भी हडक़ंप मचा हुआ है।
१७२ केंद्रों पर मिल रहा यूरिया, दलोदा, गरोठ के लिए मांग
जिले में वर्तमान स्थिति में १७२ केंद्रों पर यूरिया मिल रहा है। 3609 मैट्रिक टन यूरिया है। तो वहीं 2257 मैट्रिक टन, 554 मैट्रिक टन एमओपी, 2467 मैट्रिक टन एनपीकेएस तथा 12743 मैट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। गरोठ व दलोदा के लिए अलग से रैक की मांग की है। इसके अलावा अन्य जगहों के लिए भी डिमांग की है। जिले में यूरिया खाद की किल्लत जैसी स्थिति कही पर नहीं है। -डॉ आंनदकुमार बड़ोनिया, उपसंचालक, कृषि