31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मंदसौर

video शिवना के घाटों व किनारों पर रसूखदारों का कब्जा, कर रहे है खेती, अफसरों को नहीं दिख रही

शिवना के घाटों व किनारों पर रसूखदारों का कब्जा, कर रहे है खेती, अफसरों को नहीं दिख रही

Google source verification


मंदसौर.
शिवना शुद्धिकरण से लेकर सौंदर्यीकरण की मांग दो दशक से चली आ रही है। लेकिन शुद्ध ओर प्रदूषण के दाग को धोना तो दूर की बात लेकिन शिवना के किनारों पर कब्जा कर हो रही खेती ओर घाटों पर अतिक्रमण तक अफसरो को नहीं दिख रहा है। जब शहर में यह हालात है तो गांवों में शिवना के किनारों पर कब्जा कोन देखेगा। सालों से शिवना के लिए योजनाएं बन रही है और शहरवासी अपना पसीना बहाकर यहां श्रम कर रहे है लेकिन किनारों पर जो कब्जा लगाकर बढ़ता जा रहा है वह कोई नहीं देख रहा है, जबकि उसके लिए किसी योजना की नहीं बल्कि अफसरो की ईच्छाशक्ति की ही जरुरत है। लेकिन सालों नदी के किनारों व नदी में ही कब्जा कर खेती हो रही है और शहर में तो शिवना के दूषित पानी से ही सब्जियों की खेती बेरोकटोक हो रही है। लेकिन रसूखदार कब्जेधारियों को हटाने की जहमत जिला प्रशासन के अफसर नहीं कर पा रहे है।


शिवना के सीमांकन की कई सालोंं से चली आ रही मांग
मां शिवना का आंचल पहले ही शहरीय क्षेत्र में सीवर के कारण दागदार है। और ऐसे में इसी दूषित और जहरीले पानी से नदी के किनारों पर ही खेती की जा रही है और खासकर सब्जियों की खेती हो रही है। बावजूद इस और किसी का ध्यान नहीं है। शिवना के पाटों पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण को देखते हुए इसका सीमांकन कराने और अतिक्रमण को हटाने की मांग शिवना के लिए काम कर रही संस्थाओं के पदाधिकारी करते भी आए है, लेकिन यह अब तक नहीं हो पाया है। सालों से नदी के सीमांकन की पूरे क्षेत्र में मांग चल रही है। लेकिन गांव व शहर किसी भी सीमा पर नदियों का सीमांकन नहीं हो रहा है। इसी कारण इनका अस्तित्व पर रसूखदार कब्जा जमाते आ रहे है।


पूरी शिवना पर कब्जा कर हो रही इसी दूषित पानी से सब्जी
शहरीय क्षेत्र से ८ किमी क्षेत्र में शिवना गुजर रही है। इसमें ८ किमी का क्षेत्र प्रदूषित है और नालों के मिल रहे पानी के कारण प्रदूषण का ग्राफ भी बढ़ रहा है। बावजूद इसके बारिश के दिनों को छोड़ बाकी दिनों में शिवना के पाटों पर कब्जा कर खेत तैयार कर इसी पानी से खेती की जा रही है। लेकिन कोई रोकने वाला नहीं है। शिवना शुद्धिकरण व गहरीकरण के अभियान व योजनाएं तो बन रही है लेकिन शिवना नदी पर कब्जा कर छोटा कर इन अतिक्रमणकर्ताओं को हटाकर नदी का सीमांकन कर इनसे कब्जा हटाने की कोई योजना ही नहीं है और ना ही इस पर बात हो रही है।


नक्शा है पर राजस्व अमला देख ही नहीं रहा
शिवना शुद्धिकरण अभियान पिछले सालों में चला ओर शिवना पर श्रमदान संस्थाएं करती भी है ओर शिवना नदी का नक्शा भी बना है लेकिन राजस्व विभाग का अमला शिवना नदी के इस नक्शे को देखने की हिम्मत ही नहीं दिखा पा रहा है। इसी कारण शिवना के पाटों व किनारों पर कब्जा कर खेती का काम किया जा रहा है।