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5100 मच्छरदानियों का बिछा जाल तो जीरो हो गया मलेरिया का ग्राफ

5100 मच्छरदानियों का बिछा जाल तो जीरो हो गया मलेरिया का ग्राफ

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5100 मच्छरदानियों का बिछा जाल तो जीरो हो गया मलेरिया का ग्राफ

मंदसौर.

जिले में जैसे जैसे रक्तपट्टिकाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। वैसे वैसे मलेरिया के ग्राफ में कमी आती जा रही है। जहां पांच साल पहले २५० से अधिक मरीज मलेरिया से प्रभावित होते थे। वहीं गत वर्ष मात्र ८६ मरीजों को ही मलेरिया ने अपनी चपेट में लिया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिले के संवेदनशील क्षेत्र में मेडिकेटेड मच्छादानियों का जाल बिछने से मलेरिया का ग्राफ जीरो हो गया है।

आंकड़ों पर नजर डाले तो साफ पता चल रहा है कि वर्ष २०१५ और २०१६ में मलेरिया के मरीजों ने ३०० का आंकड़ा पार कर लिया था, लेकिन इसके बाद फिर मलेरिया के मरीजों में गिरावट आने लगी। वहीं पिछले पांच साल की तुलना में वर्ष २०१८ में मलेरिया का ग्राफ मात्र ३२ प्रतिशत रह गया है।


मेडिकेटेड मच्छरदानियों का दिखा कमाल, जीरो हुए मरीज
जिले के संधारा भानपुरा क्षेत्र के दो सब सेंटर धावद और नामली के करीब ८९७५ जनसंख्या वाले ९ गांवों में विभाग द्वारा मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण इस साल किया है। जिसका असर अभी से दिखना शुरू हो गया है। क्योंकि १५ मार्च तक जिले में करीब ३१ हजार ५९४ लोगों की खून की जांच करने में एक को भी मलेरिया पॉजीटिव नहीं आया है।


बारिश से पूर्व शुरू किया जागरूकता अभियान
मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस के बारे में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी देकर जागरूक करने के कारण मलेरिया के ग्राफ में कमी आ रही है। विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में घर घर जाकर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। लोगों को अभी से बताया जा रहा है कि किस प्रकार मच्छर की रोकथाम की जा सकती है। आशा और संबंधित कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने अपने क्षेत्र में मलेरिया सहित अन्य बीमारियों के नियंत्रण के लिए आमजन को जागरूक करें। -प्रेमलता डाबी, जिला मलेरिया अधिकारी, मंदसौर