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मंदसौर.
गांधीसागर अभ्यारण्य क्षेत्र के 368.62 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गिद्धों की एक दिवसीय गणना का कार्य संपन्न हुआ। सीसीएफ उज्जैन और डीएफओ मंदसौर के निर्देशानुसार वनविभाग की टीम द्वारा समितियों की सहायता से गणना सुबह 6 से ९ बजे तक चली। जिसके प्रथम चरण में नेस्टिंग के आधार पर गणना की। जिसमें घोसले, वयस्क गिद्ध, चूजे और अंडे सहित बीट, पंख, पंजों के निशान देखे गए। अधिकारियों ने दावा किया कि पूरे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक गिद्धों का संरक्षण मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण्य में हुआ है। यहां इनकी संख्या करीब ७०० से अधिक है। अभ्यारण्य में एक भी गिद्ध के भी मृत मिलने की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
नेस्टिंग और रूस्टिंग से की गई गणना
गिद्धों की यह गणना नेस्टिंग और रूस्टिंग तरीके से की गई है। इसमें नेस्टिंग के आधार पर गणना की गई। इस गणना में चट्टानों सहित विभिन्न जगहों पर बने गिद्धों के घोंसलों में हाइडेफिनेशन कैमरे से कैप्चर किया गया। साथ ही दूरबीन का उपयोग कर गिद्धों व चूजों को चिन्हित किया। मंगलवार को रूस्टिंग के आधार पर गणना की जाएगी।
नाव और हाई-डेफिनेशन कैमरों की ली मदद
नेस्टिंग के आधार पर हुई गणना में 30 कर्मचारियों की टीम ने चार अधिकारियों के निर्देशन में 23 बीटों में बंटकर अभ्यारण्य के अलावा गांधीसागर झील में नाव और हाई- डेफिनेशन कैमरों की मदद से गणना की। जिसमें डायली उत्तर, डायली दक्षिण, डायली मध्य, नेत्रावाला, कालापानी, रावलीकुडी, कुंती, बुज, करणपुरा उत्तर, करणपुरा दक्षिण, रावलीकुडी दक्षिण, रावलीकुडी पूर्व, चंबल-8, चंबल-3, भडक़ा, धावत, नरसीझर, हरीगढ़, दांतला, केथूली, महादेव जगहों पर गणना की।
चूजे सहित ६४२ गिद्ध मिले
नेस्टिंग व रुस्टिंग के आधार पर हुई गणना में चूजे सहित ६४२ गिद्धों की संख्या सामने आई है। जिसमें कुल 113 घोंसलों पर टीमें पहुंची। 10 माह पहले पूरे प्रदेश में एक साथ गिद्धों की गणना की गई थी। इसमें गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र में चूजे और वयस्क गिद्ध मिलाकर ६४७ संख्या सामने आई थी। जो कि जनवरी 2016 की गणना से अधिक थी। गांधीसागर अभयारण्य में सफेद गिद्ध , देशी गिद्ध, राज गिद्ध, हिमालयीन गिद्ध, पत्तल चोंच गिद्ध, इजिप्शियन गिद्ध और प्रवासी गिद्ध आदि प्रजाति के गिद्ध पाए जाते है।
गणना में पिछले साल से ५ गिद्ध मिले कम
गतदिवस हुई गणना में ६४२ गिद्ध मिले है। चूंकि गांधीसागर अभ्यारण्य से राजस्थान बार्डर लगी है। ऐसे मेंं राजस्थान सीमा होने के कारण कई गिद्ध भोजन की तलाश में इस क्षेत्र बनें घोसलों में पहुंच जाते है, सुबह जब तक अच्छी धूप नहीं निकलती है तब तक गिद्ध अपने आवास पर ही बैठा रहता है। चूंकि गणना का समय सुबह ६ से ९ तक था, ऐसे में गणना में इन गिद्धो का शामिल करना संभव नहीं हो पाया। यदि यह गिद्ध भी गणना में शामिल होते तो अभ्यारण्य में गिद्धों की संख्या ७०० से अधिक ही रहती। एक भी गिद्ध के मृत होने की जानकारी या सूचना विभाग को प्राप्त नहीं मिली है।
- यूके शर्मा, वन मंडलाधिकारी, मंदसौर
Published on:
26 Feb 2018 01:26 pm
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