स्वच्छ पानी नहीं, प्रदूषण और जलकुंभी ही बन गया शिवना का नसीब
मंदसौर.
शहर सहित जिले के ३५ गांवों से गुजर रही शिवना नदी अनदेखी के कारण इन दिनों बदहाल स्थिति में है। स्वच्छ पानी की जगह शिवना का नसीब ही जलकुंभी व प्रदूषित पानी बन गया है। दो दशक से शहर में शिवना शुद्धिकरण की मांग चली आ रही है। आलम यह है कि हर चुनाव का बड़ा मुद्दा होने के बाद अब तक शिवना की सुरत नहीं बदली है। अधिकांश गांवों में नदी मैदान बन गई है तो शहर में यह नालें के रुप में दिख रही है। शिवना नदी अब अपना अस्तित्व तलाशने के साथ बदहाली पर आंसू बहा रही है।
बालोदिया से निकली शिवना ५४ किमी का सफर कर चंबल में होती है विलय
शिवना नदी का उद्गम स्थल मंदसौर जिले के भावगढ़ क्षेत्र के गांव बालोदिया से हुआ है। वहां से निकलकर मंदसौर शहर से होते हुए सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में होते हुए नाहरगढ़, बिल्लोद के बाद चंबल नदी में मिलती है। इस दौरान शिवना नदी करीब ५४ किमी क्षेेत्र में बहती है। इतने लंबे क्षेत्र में करीब ४० किमी क्षेत्र नदी का जलभरण वाला क्षेत्र है। ५४ किमी वाली इस नदी में कुल २८ छोटे-बडे व स्टॉप से लेकर चेक डेम बने हुए है। जो गांवों से लेकर मंदसौर शहर की प्यास बुझा रहे है। लेकिन बारिश के बाद के कुछ माह के बाद पूरे समय नदी सुख और मैदान के रुप में ही दिखती है।
पशपुतिनाथ के आंगन में बह रही शिवना का नसीब बना जलकुंभी
शहरीय क्षेत्र से गुजर रही शिवना नदी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा ही। भगवान पशुपतिनाथ के आंगन में बहती शिवना का नसीब ही मानों जलकुंभी और प्रदूषण हो गया है। प्रदूषित होते पानी के कारण गर्मी आने के साथ हर बार नदी के पानी पर जलकुंभी जमा हो जाती है तो बारिश में शिवना के उफान पर आने के साथ दूर होती है। शहरीय क्षेत्र में जलकुंभी से पूरी नदी पटी हुई है। दो दशक के लंबे इंतजार के बाद भी जलकुंभी व प्रदूषण का दाग शिवना से दूर नहीं हुआ है।