
mp rajasthan bridge project delay mandsaur people waiting since 2019
mp news: मंदसौर जिले में लगा मध्यप्रदेश को राजस्थान से जोड़ने वाला पुल साल 2019 में आई बाढ़ में बह गया था। तब से अब तक लोग इसके बनने की बाट जोह रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इसके लिए 18 करोड़ रुपए भी मंजूर कर दिए थे, फिर भी निर्माण उलझा हुआ है। ऐसे में चोमहेला के रास्ते राजस्थान से जिले में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। हर दिन नाव व स्टीमर के सहारे चंबल नदी पार करनी पड़ रही है। दिलचस्प बात ये है कि साल 2020 में सुवासरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में इस पुल के नाम पर नेताओं ने वोट भी मांगे थे।
इस पुल के लिए 6 बार टेंडर प्रक्रिया भी हो चुकी है। यहां तक कि मिट्टी सर्वे से लेकर डिजाइन तक बन चुकी है। चंबल में पानी की गहराई यहां अधिक होने के कारण भी निर्माण में अवरोध खड़ा हो रहा है। प्रक्रियाओं में उलझे पुल का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सेतु विभाग के एसडीओ प्रवीण नरवरे ने बताया कि चंबल पर ब्रिज को लेकर मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। अभी विभागीय प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद इस पर काम की शुरुआत होगी।
इसी तरह छतरपुर जिले के नौगांव के ग्राम पंचायत चंद्रपुरा में स्थित 50 मीटर लंबे पुल का मामला भी अब ग्रामीणों के लिए एक गंभीर संकट बन गया है। यह पुल 2025 में हुई अतिवृष्टि के दौरान ढह गया था और तब से लेकर आज तक इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है। पुल के टूटने से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को जोड़ने वाला संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें रोजाना कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय, पैसा और मेहनत तीनों की बर्बादी हो रही है। आपातकालीन परिस्थितियों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है, जबकि स्कूली बच्चों को जोखिम भरे वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ता है। किसान अपनी फसल और उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
Published on:
04 Feb 2026 05:01 pm
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